एनके मुरलीधर
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। कांग्रेस पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसमें मैं खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा। मैं न तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और न ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता। इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।
गौरव वल्लभ ने कांग्रेस के प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। गौरव उन कांग्रेसियों में थे जो आर्थिक विषयों के मर्मज्ञ थे और कई मोर्चा पर भाजपा सहित एनडीए की कसकर घेराबंदी करते थे। उन्होंने जिन दो बिंदुओं पर कांग्रेस को आईना दिखाया सही में उन दो बिंदुओं को न समझ पाने के कारण ही कांग्रेस की दुर्गति हुई है। इन नीतियों के संप्रेषण में कांग्रेस से एक बड़ी भूल हुई है और वह है अडानी को लगातार टारगेट करना।
राम मंदिर शुभारंभ के कार्यक्रम की उपेक्षा करने की उसकी नीति से अधिक खतरनाक है देश के उद्योगपतियों को अकारण गाली देना, उनके उपर जो देश-विदेश में षडयंत्र होता है उसको नैतिक समर्थन देना। निश्चित तौर पर देश की नयी आर्थिक नीति जो 1991 में देश में लागू किया गया उसके मूल में निजीकरण ही था। भारतीय जनता पार्टी में इतनी ईमानदारी थी कि वह इस नीति का पूरजोर विरोध नहीं करती थी। आज देश का विकास निजीकरण के नींव पर खड़ा है।
अगर अमेरिका, जर्मनी, चीन औरजापान की बात करें तो उन देशों में आर्थिक नीतियों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच एक सहमति बनी रहती है जिससे विकास का पहिया तेज घूमता है। लेकिन भारत में कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी लगातार अडानी समूह की आलोचना करते रहते हैं। चूंकि गौरव खुद आर्थिक मामलों के जानकार हैं इस कारण वे कांग्रेस के इस प्रकार की नीतियोंसे क्षुब्ध थे। आज देश की हालत बेहतर इसलिये है कि निजी क्षेत्र पूरी ताकत से विकास कर रहा है।
देश के 6.40 करोड़ सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों से देश के लोगों को जहां जॉब मिला है वहीं आर्थिक गतिविधियों को भी एक नया मुकाम प्राप्त हुआ है। इन्हीं लघु और मध्यम उद्योगों के बीच से अडानी रिलायंस जैसे उद्यौगिक समूह का लगातार विकास होना देश के विकास का शुभ संकेत है। आज टाटा समूह का कुल एसेट पाकिस्तान की बजट से अधिक हो गया है।
वर्तमान वैश्वीकरण के दौर में निजी कंपनियों के सहारे ही विश्व के विकसित देशों की आर्थिक गति और विकास टिकी हुई है। राहुल गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस राफेल युद्धक विभान के फ्रांस से खरीदी के बाद हमारी सैन्य शक्तिसे चीन और पाकिस्तान संतुलित हुए है वह एक निजी कंपनी का उत्पाद है। आज देश में 21 हजार करोड़ के रक्षा उत्पाद का निर्यात हुआ है जिसमें अडानी समूह का भी एक बड़ा योगदान है।
निजीकरण को लेकर देश में एक विरोधी माहौल बनाने का प्रयास किसी भी हालत में देश हित में नहीं है। कांग्रेस को इसका परिणाम भुगतना ही होगा या रणनीति बदलनी होगी। देश के कुल कार्यबल में 98 प्रतिशत कामगार निजी क्षेत्र में कार्य करते हैं। इस कोण से भी देखा जाए तो उन्हें लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों में ही काम मिला हुआ है।
यह दुख और आश्चर्य का विषय है कि कांग्रेस की नीतियों को वर्तमान सरकार तेजी से बढ़ा कर देश को दोहरे और अधूरे माहौल से निकालना चाहती है जिससे हम दुनिया में विकसित राष्ट, की श्रेणी में खड़ा हो सके। आर्थिक विषयों, रक्षा मामलों, सेना और अतंरिक्ष के विषयों पर कांग्रेस को बहुत चिंतन की आवश्यकता है अन्यथा कांग्रेस का गौरव सिर्फ चर्चा का विषय रह जायेगा।