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घर के गैजेट्स से करें मासूम की सुरक्षा

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घर के गैजेट्स से करें मासूम की सुरक्षा
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  • मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग के लिए घर में इलेक्ट्रिकल सॉकेट में चार्जर लगे रहते हैं। इन तारों को छोटे बच्चे मुंह में चबा सकते हैं या सॉकेट में अंगुली डाल सकते हैं। करंट के चलते हादसा हो सकता है। ऐसे में सतर्कता जरूरी है। गैजेट्स चार्ज कर स्विचआफ करें, सॉकेट बच्चों की पहुंच से दूर रखें या फिर चाइल्ड प्रूफिंग करवा दें। 

डॉ मोनिका शर्मा 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। कुछ समय पहले कर्नाटक में मोबाइल चार्जर के करंट से आठ महीने की मासूम बच्ची का जीवन छिन गया। सॉकेट में लगे चार्जर के तार से खेलते हुए बच्ची ने उसे मुंह में चबा लिया। जिससे करंट लगने से उसकी जान चली गई। इस तरह की खबरें कई बार अलग-अलग समाचार माध्यमों में पहले भी सामने आयी हैं। ऐसी दुर्घटनाएं हर किसी की चेताने वाली है। दरअसल, हमारी जिंदगी में बढ़ते स्मार्ट गैजेट्स ने ऐसे हादसों की आशंका बढ़ा दी है। घरों के कोने-कोने में चार्जर लगे होते हैं वहीं स्मार्ट फोन, लैपटॉप, ईयर प्लग्स और जाने क्या-क्या? ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए चार्जर के मामले में भी सतर्कता बरतना आवश्यक है। 

सही जगह चुनें 

जहां तक बच्चों की संभाल का मामला है तो बच्चों के लिए घर से सुरक्षित जगह कोई नहीं होती है। माता-पिता इसके लिए हर संभव इंतजाम करने की कोशिश भी करते हैं। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी हर सुविधा जुटाते हैं पर कई बार घर के बड़ों की एक छोटी सी लापरवाही बच्चों की सेफ्टी के लिए खतरा बन जाती है। 

मामूली सी गलती बड़ी दुर्घटना को न्योता देने वाली साबित होती है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के चार्जर्स को लेकर बेहद सतर्क रहना जरूरी है। यहां-वहां किसी भी सॉकेट में चार्जर न लगाएं। घर में छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए चार्जर हमेशा किसी ऊंची जगह पर लगे सॉकेट में लगाएं या फिर चार्जर किसी ऐसे कोने में लगा हो जहां बच्चे पहुंच ही न पायें। 

स्विच आफ करना न भूलें 

घर के भीतर बच्चों के साथ होने वाली ऐसी ज्यादातर दुर्घटनाओं को घर के बड़ों की थोड़ी सी सजगता से रोका जा सकता है। स्मार्ट गैजेट्स को चार्ज करने के बाद स्विच आफ करना ऐसा ही छोटा सा कदम है, जो किसी अनहोनी को टाल सकता है। देखने में आता है हमारे घरों में लगे बहुत से चार्जर्स का स्विच आफ ही नहीं किया जाता। 

पैरेंट्स को अपनी इस आदत को बदलने की आवश्यकता है क्योंकि बच्चे अपनी जिज्ञासा और चंचलता के कारण सॉकेट के साथ खेलने लगते हैं। स्विच का आन होना करंट लगने के कारण हादसा बन सकता है। वैसे कोशिश तो यही होनी चाहिए कि बच्चे सॉकेट के पास ही न पहुंचें। सॉकेट में लगे चार्जर को वे छू भी न पाएं। फिर भी कभी ऐसा हो जाये तो चार्जर वाले सॉकेट का स्विच आॅफ होने से दुर्घटना का खतरा बहुत हद तक टल जाता है। 

सुरक्षा के इंतजाम 

घर में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रिकल सॉकेट में चार्जर्स लगाने से जुड़ी सावधानियां बरतने के साथ ही उपयोग में न आ रहे सॉकेट्स पर भी गौर कीजिए। कई बार ऐसा होता है कि काम में न आने वाले सॉकेट भी हादसों का कारण बन जाते हैं। 

बच्चे खेलते हुए कइ बार सॉकेट में अंगुली, कभी किसी खिलौने का हिस्सा या कोई अन्य चीज डाल देते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि घर में जिन इलेक्ट्रिकल सॉकेट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा उन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जाये। 

इसके लिए तकनीकी उपाय या किसी मॉडर्न उपकरण का सहारा लिया जा सकता है। बिजली के ऐसे सॉकेट के लिए बाजार में चाइल्ड प्रूफिंग भी उपलब्ध है। इसे लगाकर घर में ऐसे सॉकेट्स के जोखिम से बच्चे की सुरक्षा यकीनी बनायी जा सकती है। असल में चाइल्ड प्रूफिंग, एक तरह का छोटा सा इलेक्ट्रिकल सॉकेट कवर होता है। इसे लगाने से घर में यहां-वहां लगे सॉकेट आपके नन्हे बच्चों के लिए खतरा नहीं बन सकते। ऐसी छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर पैरेंट्स द्वारा बच्चों के लिए अपने घर के आंगन को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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