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प्रभु के आगमन काल में प्रवेश कर चुके हैं इसाई धर्मावलंबी

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प्रभु के आगमन काल में प्रवेश कर चुके हैं इसाई धर्मावलंबी
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कुलदीप तिर्की

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। इसाई धर्मावलंबी आगमन काल में प्रवेश कर चुके हैं और अपने पभु के जन्मोत्सव की तैयारी में लग गये हैं न सिर्फ बाह्य रूप से बल्कि आंतरिक रूप से भी कई बार हम अपने प्रभु की योजना को समझ नहीं पाते और उनसे दूर हो जाते हैं। तैयार एक छोटी सी कहानी से समझने का प्रयास करते हैं। 

एक बार एक अध्यापक कक्षा में विद्यार्थियों को तितली की इल्ली के बारे में पढ़ा रहे थे। उन्होंने उनसे कहा कि यह इल्ली दो घंटे बाद तितली में बदल जायेगी लेकिन इसके लिए उन्हें अपने खोल से बाहर आने में संघर्ष करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जब इल्ली बाहर निकलने की कोशिश करें तो कोई भी उस इल्ली की मदद न करें। यह कहकर वे कक्षा से बाहर चले गए। 

सभी विद्यार्थियों ने उसे ध्यान से देखना शुरू कर दिया। दो घंटे बाद इल्ली ने बाहर निकलने की कोशिश शुरू कर दी। उसे इतना संघर्ष करते हुए देख एक छात्र को उस पर दया आ गई और उसने इल्ली की सहायता करनी शुरू कर दी। 

तभी अध्यापक कक्षा में आ गये और उसे रोक दिया। वे विद्यार्थियों को समझाने लगे कि यदि इल्ली ने बाहर आने ने संघर्ष नहीं किया और बाहर आ गयी, तो यह मर जायेगी और इसके विपरीत यदि यह बिना सहायता के बाहर आयी तो बच जायेगी। 

अपने खोल से बाहर आने के लिए जो संघर्ष करती हैं, वह तितली के पंखों को मजबूत करता है। कई बार हमारे जीवन में तकलीफ आती है  दु:ख आते हैं समस्याएं आती है और हम अपने सृष्टकर्ता को कोसते है उनसे दूर होने की योजना बनाने लगते है।

आगमण काल हमे याद दिलाता है  और संदेश देता है कि हमारे सृष्टकर्ता हमारी मजबूती के लिए हमारे जीवन में दु:ख तकलीफ देते हैं हमारी परीक्षा लेते हैं ताकि हम और मजबूत हो सकें उनपर भरोषा और विश्वास कर सकें। तभी क्रिसमस का असली आनंद हमारे जीवन में आयेगा। (लेखक रांची महाधर्मप्रांतीय यूथ कोर्डिनेटर हैं।)

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