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मानव जीवन में योग का महत्व

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मानव जीवन में योग का महत्व
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योगाचार्य महेश पाल  

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। वर्तमान समय में स्वास्थ्यमय जीवन जीने की पद्धति का नाम योग है। बदलती दैनिक दिनचर्या, भोजन में आए बदलाव एवं लगातार कंप्यूटर, सेल फोन, सोशल मीडिया आदि के उपयोग के कारण दिन-प्रतिदिन हमारे अंदर विभिन्न प्रकार के रोग जन्म ले रहे हैं। जिनके कारण बच्चे चिड़चिड़ेपन का शिकार होते जा रहे हैं।

युवा नसे के साथ-साथ मानसिक तनाव, अवसाद मोटापा, हृदय रोग, अनियंत्रित शारीरिक विकास जैसी समस्याओं से ग्रस्त होते जा रहे हैं। वही महिलाओं में मोटापा, थायराइड, पीसीओडी, डायबिटीज, बीपी जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त होती जा रही है।

ऐसी स्थिति में योग हमारे जीवन में लगभग सभी प्रकार के रोगों से बचाव करता ओर हमे पूर्ण रुप से शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखता है और अध्यात्म की ओर आगे बढ़ने में मदद करता है हठ यौगिक ग्रंथ घेरंड संहिता के अनुसार हमारे शरीर में षट्कर्म शोधन का कार्य करता है।

आसन से दृढ़ता (मजबूती) आती हैं। मुद्रा से स्थिरता, प्रत्याहार से धैर्यता, प्राणायाम से लघुता / हल्कापन प्राण ऊर्जा को बढ़ाया जाता है। ध्यान परमात्मा से प्रत्यक्षीकरण/ साक्षात्कार कराने का साधन है समाधि से निर्लिप्तता/अनासक्त अवस्था प्राप्त हो जाती है और योगमय जीवन जीने से जीवन का सम्पूर्ण उद्देश्य पूरा हो जाता हैं।

जैसा की हम सब जानते हैं इस वार 21 जून को भारत ही नहीं वल्कि संपूर्ण विश्व 9वा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहा है। प्रतिवर्ष 21 जून का यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीघार्यु प्रदान करता है।

पहली बार यह दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया, जिसकी पहल भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है।

विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है।

हमारी बदलती जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आयें एक अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं। जिसके बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। 

11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमन्त्री मोदी जी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अन्दर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय का रहा।

इस वार 9वे अंतराष्ट्रीय योग दिवस 2023 की थीम वसुधैव कुटुंबकम के लिए योग वसुधैव कुटुंबकम का अर्थ है- धरती ही परिवार है। इस थीम से तात्पर्य धरती पर सभी लोगों के स्वास्थ्य के लिए योग की उपयोगिता से है में बस इतना ही कहना चाहुंगा की योग को दैनिक दिनचर्या मैं सामिल करें और स्वयं को स्वस्थ बनाए अपने परिवार को स्वस्थ रखे और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभायें। (योगाचार्य महेश पाल पतंजलि जिला युवा प्रभारी और विमुक्त घुमंतू अर्ध घुमंतू महासंघ इंदौर संभाग के प्रभारी भी हैं।)

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