विचार
मैं झारखंड हूं, आज मेरा जन्म दिन है...
ABN Bureau
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13 Nov, 2021
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एबीएन डेस्क (एनके मुरलीधर)। मैं झारखंड हूं। 15 नवंबर 2000 को मेरा जन्म हुआ। मेरा जन्म दिन उल्लास और खुशी के साथ विरोध के शब्दों के बीच हुआ। मैं आंदोलन से जन्म लेने वाला राज्य हूं। आज जब मैं युवा हो चुका हूं और मैं यह नहीं कह सकता कि मेरी योग्यता नहीं थी कि मैं विकसित राज्य न बन सकूं। मेरे अंदर पूरे देश को ऊर्जा देने के लायक कोयला है, मैंने निजी क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में एक टाटा उद्योग समूह को पनपने और बढ़ने का धरातल तैयार किया है। एशिया का सबसे बड़ा लोहा उद्योग बोकारो प्लांट विकसित किया है। मदर इंडस्ट्रीज के नाम से विश्व विख्यात हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन, सिंदरी का खाद कारखाना, जादूगोड़ा के यूरेनियम सहित पूरे देश का सबसे अधिक खनिज वाला राज्य हूं। वर्ष 2000 के पहले मेरे पास एक राजनैतिक कारण था, जब मैं कहता था कि बिहार राज्य का हिस्सा होने के कारण मेरे साथ अन्याय हो रहा है। राजनीति की क्षुद्र धारा में प्रवाहित होना मेरी मजबूरी थी, हर सुविधा से मोहताज था। ऐसा पूरी तरह से नहीं था, लेकिन आंशिक तौर पर सही भी था। राजनीतिक कारणों से मेरा जन्म हुआ और मैंने उम्मीद कि की अब मेरी सभी समस्याएं दूर हो जाएगी। मैं जंगलों से भरा, प्राकृतिक जल धाराओं की ध्वनि से प्रफुल्लित होता, वन्य जीवों के साथ उद्योग का सामंजस्य बैठाये आर्थिक रूप से एक संपन्न राज्य था। मेरा बजट लाभकारी था। पूरे देश ही नहीं विश्व का ध्यान मेरी संसाधनों पर था और मैं भी सीना ताने देश के अन्य राज्यों के तरह विकसित राज्य कहलाना चाहता था। आखिर हमारे बच्चे भी उच्च स्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ राष्टÑीय अतंरराष्टÑीय पटल पर छाने की योग्यता रखते हैं। चाहे वह हॉकी की टीम हो या तीरदांजी की, चाहे क्रिकेट हो या फुटबॉल खेल भावना और मेघा हमारे रक्त में भरा है। हमारा चरित्र सरलता और सहजता के साथ अद्भुत संतोषभाव से जुड़ा है जिसकी आज दुनिया को आवश्यकता है। मैं कभी पलायन कभी नक्सली हिंसा से प्रभावित था लेकिन अब सहज हो रहा हूं। मेरा स्वभाव ही नहीं है कि किसी अतिरेक क्रिया के प्रति प्रतिक्रिया से जबाव दूं। हमारे शहरों और कस्बों को ध्यान से देखिये हर शहर देश ही नहीं दुनिया को आकर्षित करने की खासियत रखता है। रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, देवघर, मेदिनीनगर, दुमका, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, गुमला सहित हर छोटे-बड़े स्थानों से राष्टÑीय और अंतरराष्टÑीय हस्ताक्षर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। बेतला के दुनिया के पहले टाइगर प्रोजेक्ट से चैतन्य महाप्रभु और आदि शंकराचार्य के मलूटी और छिन्नमस्तिका तक हमारा हर कोना अपनी खासियत से आपको खींचता है। नेतरहाट और लोध जल प्रपात जैसे सुरम्य स्थल हमारी संपूर्णता पर चार चांद लगाते हैं। मैं अपने साढ़े तीन करोड़ कर्मठ जनों के साथ बढ़ रहा हूं। मेरा स्वभाव है निर्मल इसलिए कभी किसी से शिकायत नहीं करता। मैं अपनी संस्कृति और विरासतों के साथ संपन्न नहीं होना चाहता। मैं समृद्ध होना चाहता हूं अपने उन मानवीय मूल्यों के साथ, जिसे बिरसा मुंडा सहित हमारे महान आदि पूर्वजों से संवारा है। मेरी आलोचना का जवाब मैं नहीं देता, आज मैं सभी शुभेच्छुओं को माफ कर रहा हूं और आलोचकों को भी। हर कण-कण के योगदान से बढ़ा हूं और आगे बढ़ता ही रहूंगा।
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