विचार
स्त्री अस्मिता का बेखौफ लेखन...
ABN Bureau
•
01 Nov, 2022
•
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एबीएन एडिटोरियल डेस्क (इंद्रजीत सिंह)। हर बड़ा साहित्यकार अपने समय और समाज के मौन को मुखरित करने का काम करता है। चुप्पियों के पहाड़ को अपने कलम के हथौड़े से तोड़ता है। हाशिये पर पड़े लोगों की आवाज को परवाज देने का काम भी लेखक की जिम्मेदारी होती है। जड़ता को तोड़ने और जड़ों से जोड़ने का काम भी संवेदनशील रचनाकार करता है। फ्रांस की मशहूर लेखिका एनी एनॉक्स (अर्नाक्स) ने भी सामाजिक सरोकारों को अपनी संवेदनशील लेखनी का आधार बनाया। नोबेल पुरस्कार समिति ने एनी के योगदान को इन शब्दों में रेखांकित किया है- एनी को यह पुरस्कार उनके साहस, नैदानिक विलक्षणता के साथ व्यक्तिगत स्मृति की जड़ों, मनमुटाव और सामूहिक पाबंदियों को उजागर करने के लिए दिया गया है।
वर्ष 1940 में फ्रांस में जन्मी एनी ने अपने जीवन के खट्टे-मीठे-कड़वे अनुभवों को निर्भय होकर समाज तक पहुंचाया। कबीर साहब के शब्दों में जो लड़े दीन के हेतु सूरा सो ही, हर अच्छा-सच्चा लेखक समाज की कुरीतियों, बुराइयों और सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने का काम साहस के साथ बेखौफ होकर करता है। एनी ने भी निर्भयता के साथ सरल, सहज भाषा में सामाजिक असमानता को रेखांकित किया। वह अपने लेखन में राजनीति को अलग नहीं करतीं। उनका लेखन राजनैतिक कर्म है। 1974 में उन्होंने अपनी पहली रचना क्लीन्ड आउट में अवैधानिक गर्भपात की पीड़ा को समाज के साथ साझा किया।
वर्ष 1983 में उन्होंने ‘ला प्लेस’ लिखकर एक बड़े लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई। इस पुस्तक के बाद उनकी लोकप्रियता फ्रांस के साथ-साथ पूरे विश्व में होने लगी। उनकी रचनाओं के विश्व की अन्य भाषाओं में अनुवाद होने लगे। ए वूमेंस स्टोरी, ए गर्ल्स स्टोरी, ला प्लेस, सिंपल पैशन, ए फ्रोजन वूमन, हैपनिंग, द इयर्स आदि रचनाओं ने एनी की कीर्ति को देश-विदेश में बढ़ाया। एनी ने स्त्री अस्मिता पर बेखौफ लेखन किया। अपने माता-पिता की अनबन और घरेलू हिंसा पर आधारित उनका उपन्यास शेम उन्होंने बिना संकोच के साहस और साफगोई के साथ लिखा। स्त्री की गरिमा के लिए उन्होंने खूब लिखा।
एनी की रचनाओं पर फिल्मों का निर्माण भी हुआ जिसमें हैपनिंग और सिम्पल पैशन प्रमुख है। हैपनिंग फिल्म को 2021 में वेनिस फिल्म फेस्टिवल में सर्वोत्तम फिल्म का गोल्डन लायन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2022 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करना एनी के लिए आसान नहीं था। इस प्रतिस्पर्धा में फ्रांस के 10 और लेखक नामांकित थे। इंग्लैंड से भारतीय मूल के सलमान रश्दी और भारत की तरफ से अमिताव घोष भी नामांकित थे। सलमान रश्दी पर हमले ने भी उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। लगभग 74 नामांकित रचनाकारों में एनी का चुना जाना एक सम्मान और सौभाग्य की बात है।
वर्ष 2018 में उनका आत्म कथात्मक संस्मरण द ईयर्स प्रकाशित हुआ। इसका काल खंड 1941 से 2006 तक फैला हुआ है। दूसरा विश्व युद्ध, वैश्वीकरण, स्त्रियों के साथ सामाजिक भेदभाव, यौन उत्पीड़न, गर्भपात, भूख, गरीबी और बेरोजगारी जैसे अनेक मुद्दों पर आधारित है यह किताब, जिसे एनी ने बेहद सरल सहज भाषा में बेखौफ और बेबाक तरीके से लिखा है। सामाजिक सरोकार, संवेदना और सच्चाई के साथ यथार्थ परक लेखन के कारण ही एनी को विश्व में एक बड़े लेखक के रूप में पहचान मिली। द ईयर्स को बुकर प्राइज के लिए नामांकित किया गया था।
एनी साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली 17वीं महिला हैं। सबसे पहले 1909 में स्वीडन की सेल्मा लेगरलोफी को यह सम्मान हासिल हुआ। पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि यह सम्मान जिम्मेदारी को बढ़ाने वाला है। नोबेल पुरस्कार निर्विवाद रूप से दुनिया का प्रतिष्ठित पुरस्कार है। इस पुरस्कार से पूरी दुनिया में लेखक की लोकप्रियता बढ़ती है। विभिन्न भाषाओं में अनुवाद के जरिये लेखक पूरी दुनिया के सुधी पाठकों तक पहुंचता है।
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