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हे मां! सदबुद्धि दो, ताकि कोई गर्भ में पल रहा शिशु कोख से सुरक्षित बाहर आकर अपनी मां का चेहरे देख सकें...

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हे मां! सदबुद्धि दो, ताकि कोई गर्भ में पल रहा शिशु कोख से सुरक्षित बाहर आकर अपनी मां का चेहरे देख सकें...
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टीम एबीएन, हजारीबाग (रंजन चौधरी)। शक्ति और भक्ति की देवी आदिशक्ति मां दुर्गा के पूजनोत्सव का त्योहार शारदीय नवरात्र चल रहा है। नवरात्र के पावन मौके पर मां दुर्गे के विभिन्न स्वरूपों की हम पूजा करते हैं। नारी को नारियानी मानकर नौ कन्या का आवाहन करते हैं और नारी सम्मान का संकल्प लेते हैं। मां दुर्गे से पीड़ित और शोषितों के कष्टों को निवारण करने के साथ समाज के कुंडित मानसिकता वालों, पापियों, दुराचारियों को सतमार्ग पर लाने की आराधना करते हैं। बावजूद इसके नवरात्र के पावन अवसर पर हजारीबाग जिले की दो यौवन गर्भवती महिलाओं की निर्मम मौत ने हर किसी के भक्तिमय मन को झकझोर दिया। नवरात्र शुरू होने के दूसरे दिन मंगलवार को जिले के बड़कागांव प्रखंड की नापोखुर्द गांव से एक खबर आई जिसने हर किसी को दहला दिया। यहां एक 20 वर्षीय नवविवाहिता को उसके ही पति ने गोली मार दी। मौत का कारण दहेज की मांग बताया जाता है। नवविवाहिता गर्भवती थी। गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मां के साथ ही मौत हो गई। हालांकि नापोखुर्द के ग्रामवासियों ने इस घटना का सामाजिक रूप से पुरजोर विरोध कर आरोपी के घर पर जमकर प्रदर्शन कर भारी रोष भी व्यक्त किया। ठीक इसी प्रकार की घटना नवरात्र के छठे दिन शनिवार को कटकमदाग प्रखण्ड क्षेत्र से प्रकाश में आया, जिसमें बेस गांव में एक 7 माह की गर्भवती महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गयी। यह महिला पहले घर से गायब होती है और फिर काफी खोजबीन के बाद गांव के समीप छोटी नाला जंगल में इनका शव मिलता है। इनके शव में सिर व दोनों आंखों पर गंभीर चोट के निशान देखा गया। इस घटना में भी मौत का कारण दहेज की मांग बताया जाता है। वर्तमान समय में भी दहेज लोभियों की लालच और प्रताड़ना का शिकार न जाने कितनी महिलाएं होती होंगी। दहेज के कारण इन दो नवविवाहित गर्भवती की असमय मौत और उनके गर्भ में पल रहें बच्चे को धरती पर कदम भी नहीं रखने देने वाले मनुष्य रूपी हैवानों को ईश्वर कभी माफ नहीं करेगा। समाज को भी ऐसी वीभत्स और दर्दनाक घटनाओं पर सामाजिक मंथन करने की जरूरत है, ताकि ऐसी कुत्सित घटना की पुनरावृति समाज में न हो। इन दोनों मृतक महिलाओं को देखने के बाद हम आदिशक्ति, मां जगदम्बा देवी दुर्गा से बस यही अराधना करते हैं की समाज में सभी को सद्बुद्धि दो मां, ताकि कोई बेकसूर नारी असमय काल के गाल ना समां सकें, कोई गर्भ में पल रहा बच्चा अपनी मासूमियत धरती पर कदम रखकर मां के आंचल तले बीता सके, समाज में महिलाओं के प्रति अत्याचार व क्रूरता कम हो सकें। कोई घर-आंगन किसी नारी की रक्त से रंजिश न हो, कोई परिवार बिखर कर बर्बाद न हो जायें। (लेखक हजारीबाग सदर विधायक के मीडिया प्रतिनिधि हैं।)
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