हेल्थ
हेपेटाइटिस बी और सी वायरस से हो सकता है क्रोनिक हेपेटाइटिस : डॉ संगीत सौरभ
ABN Bureau
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27 Jul, 2022
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टीम एबीएन, रांची। हेपेटाइटिस का सही समय पर इलाज होना जरूरी है। हेपेटाइटिस बी और सी का सही समय पर पहचान हो जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। इलाज से मरीज लंबा जीवन जी सकता है। लेकिन अगर इलाज न मिले या गलत इलाज हो तो मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए हेपेटाइटिस को लेकर हमारे समाज में जागरूकता जरूरी है। ये बातें बुधवार को मेदांता अस्पताल रांची के पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ संगीत सौरभ ने कही। वे विश्व हेपेटाइटिस दिवस की पूर्व संध्या पर मीडिया से अपनी बातें रख रहे थे। मेदांता अस्पताल रांची के पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ ने कहा कि हेपेटाइटिस को लेकर अब भी समाज में जागरूकता की काफी कमी है। हेपेटाइटिस मुख्य तौर पर दो तरह का होता है। एक्यूट हेपेटाइटिस और क्रोनिक हेपेटाइटिस। एक्यूट आसानी से ठीक हो जाता है। एक्यूट हेपेटाइटिस में लिवर में सूजन हो जाती है जो कि आमतौर पर दो से तीन सप्ताह में ठीक हो जाता है। यह हेपेटाइटिस ए और ई वायरस के संक्रमण के कारण होता है। इसके लक्षणों में जोंडिस होना, भूख का कम लगना, उल्टी होना, या उल्टी जैसा लगना, कमजोरी लगना, या सुस्त होना है। हेपेटाइटिस ए और ई संक्रमित खाने या पानी की वजह से होता है। ये साधारणत: बरसात के मौसम में पाया जाता है। ज्यादतर केस में ये तीन हफ्ते के अंदर खुद ही ठीक हो जाता है और इसमें केवल सपोर्टिव इलाज की आवश्यकता होती है। केवल 1 से 2 प्रतिशत केस में यह लिवर फेल्योर का का रूप ले सकता है जिसके लक्षण बेहोशी आना, पेट में सूजन होना या पांव में सूजन होना है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गैर जरूरी दवाओं से होता है कॉम्प्लिकेटेड एक्यूट हेपेटाइटिस : कॉम्प्लिकेटेड एक्यूट हेपेटाइटिस गैरजरूरी दवाईयों या जड़ी-बूटी के सेवन के वजह से होता है। एक मरीज जिनको पहले से हेपेटाइटिस है और उसे अन्य कारणों से अगर लिवर को क्षति पहुंचती है तो यह हो सकता है। मेदांता अस्पताल रांची के पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ संगीत सौरभ कहते हैं कि इस तरह के वायरल हेपेटाइटिस में किसी भी अनावश्यक दवा का सेवन ना करें क्योकि ज्यादातर केस में ये खुद से ठीक हो जाते हैं। क्रोनिक हेपेटाइटिस मुख्यत हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस की वजह से होता है। जैसा कि इसके नाम से मालूम चलता है ये लम्बी चलने वाली बीमारी होती है। इसका समय पर इलाज नहीं होने से यह लिवर सिरोसिस का रूप ले सकता है और इससे मरीजो में कैंसर होने के खतरा ज्यादा होता है। लिवर सिरोसिस होने पर बीमारी के काफी गंभीर लक्षण दिखते हैं। जिसमें जोंडिस होना, पेट में पानी आना, पाव में सूजन होना आदि शामिल हैं।
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