एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरे के बीच वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। ब्रिटेन में 6 मई को इसका पहला मामला सामने आने के बाद से अब तक करीब 3,417 मामले सामने आ चुके हैं। वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क में दुनियाभर के ऐसे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं जो महामारी को पहचानने का काम करते हैं और उसका समाधान ढूंढते हैं। हालांकि, चर्चा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जल्द ही मंकीपॉक्स को महामारी घोषित कर सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी बीमारी को महामारी कब घोषित किया जाता है।
1. वेबएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोई बीमारी कई देशों में फैल जाती है, ज्यादा लोगों पर असर डालती है और जान का जोखिम बढ़ता है तो इसे महामारी के दायरे में रखा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को महामारी में तब शामिल किया था जब इसके मामले दुनियाभर के देशों में तेजी से बढ़ने लगे थे। मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा है।
2. किसी बीमारी को महामारी घोषित करने के पीछे कई बातों को आधार बनाया जाता है। पहला, कितने लोग उस बीमारी से संक्रमित हो रहे हैं। दूसरा- वो वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण को कितना गंभीर बना रहा है यानी बीमारी कितना भयानक रूप ले रही है। कुछ खास समूह लोगों को वह बीमारी होने का खतरा कितना है और बचाव के लिए उठाए जा रहे कदम कितने प्रभावशाली हैं।
3. किसी बीमारी को महामारी घोषित करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन जिम्मेदार होता है। बीमारी को महामारी घोषित करने से पहले वह अपने दुनियाभर में मौजूद नेटवर्क से उस बीमारी से जुड़ी रिपोर्ट और डाटा मांगता है, जिसके आधार पर फैसला लिया जाता है। फैसला लेते समय 6 फेज पर नजर रखी जाती है।
4. बीमारी को महामारी घोषित करने से पहले हऌड चेक करता है कि वह कौन सी फेज में है। पहले फेज को सामान्य स्थिति माना जाता है, वहीं, बीमारी के छठे फेज में होने का कारण है उसे महामारी घोषित किया जाता है। छठे फेज का मतलब है, बीमारी कई देशों में फैल रही है और लोगों को एक-दूसरे से संक्रमण फैलने लगा है।
5. ऐसे होते हैं 6 फेज: पहला फेज: संक्रमण जानवर में पाया गया है, यह इंसानों में नहीं फैला है। दूसर फेज: जानवर में पाए गए वायरस का संक्रमण इंसानों में भी देखा गया। तीसरा फेज: जब संक्रमण एक से दूसरे इंसान में फैलता है, लेकिन बड़े स्तर पर मामले सामने नहीं आते। चौथा फेज: जब इंसानों में संक्रमण का स्तर बढ़ता है और कम्युनिटी लेवल पर मामले बढ़ते हैं। पांचवा फेज: जब संक्रमण एक से अधिक देशों में फैलता है। छठा फेज: जब संक्रमण कई देशों में फैलने लगता है और इंसान से इंसान में इंफेक्शन के मामले बढ़ते हैं।