टीम एबीएन, रांची। हमारी जीवनशैली तेजी से बदली है। इसके कारण पेट से संबंधित बीमारियां भी तेजी से बढ़ी है। फैटी लिवर की समस्या का भी कारण बदलती जीवनशैली है। अब लोग शारीरिक श्रम कम करते हैं। घंटों कुर्सियों पर बैठे रहते हैं। फास्ट फूड और जंक फूड पहले से ज्यादा खा रहे हैं। ये फास्ट फूड और जंक फूड पेट के लिए हानिकारक है। यही कारण है कि अब अस्पतालों में पेट संबंधित विभिन्न बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। यह कहना है मेदांता अस्पताल रांची के गैस्ट्रो इंट्रोलाजिस्ट या पेट एवं लिवर संबंधी रोग के विशेषज्ञ डॉ संगीत सौरव का।
डॉ संगीत सौरभ कहते हैं कि पेट से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है कि संतुलित जीवनशैली और खान-पान अपनाएं। ज्यादा तीखा और मसालेदार भोजन से परहेज़ करें। बाहर के दूषित खाना और पानी से बचें। घर में भी देर का बना हुआ बासी भोजन नहीं खाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। हर दिन कम से कम 30 मिनट तेज कदमों से पैदल चलें या व्यायाम करें। किसी तरह की कोई समस्या पेट में महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इलाज कराएं।
लिवर फैटी है तो रोजाना करें एक्सरसाइज : डॉ संगीत सौरभ बताते हैं कि आज एक बड़ी आबादी फैटी लिवर से जूझ रही है। बहुत से लोगों को तो पता भी नहीं होता कि उनके लिवर पर फैट जमा हो गई है। ऐसे लोग जब अल्ट्रसाउंड करवाने जाते हैं तब उन्हें इसका पता चलता है। फैटी लिवर को ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक ठीक नहीं होता है तो लिवर सिरोसिस का कारण बन सकता है।
फैटी लिवर के कई स्टेज होते हैं। पहले स्टेज में सिर्फ फैट जमा रहती है। आमतौर पर इससे कोई परेशानी शुरुआत में नहीं होती है। परेशानी तब होती है, जब फैट लिवर के फंक्शन को प्रभावित करने लगे। इसकी वजह से लिवर में सूजन होती है। यही सूजन आगे की बीमारी का कारण बनती है। जैसे जैसे फैटी लिवर की स्टेज बढ़ती जाती है वैसे वैसे लिवर में सूजन और सिकुड़न जैसी समस्या होती है। यही लिवर सिरोसिस का कारण बनता है। उन्होंने बताया कि फैटी लिवर का अर्थ लिवर पर सामान्य से ज्यादा फैट का जमा होना है। इसके दो प्रमुख कारण होते हैं। पहला अल्कोहलिक और दूसरा गैर अल्कोहलिक कारण। अल्कोहलिक कारण तब होता है जब मरीज ज्यादा शराब पीता है। वहीं गैर अल्कोहलिक का कारण मरीज का मोटापा, डायबिटीज, शारीरिक श्रम नहीं करना आदि हैं। इसलिए फैटी लिवर के मरीज रोजाना व्यायाम करें।
हेपेटाइटिस बी और सी का अब बेहतर इलाज उपलब्ध है : डॉ संगीत सौरभ कहते हैं कि लिवर से संबंधित हेपेटाइटिस बी, सी, आदि लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां भी लिवर सिरोसिस का कारण बन सकती है। ये लिवर कैंसर का भी कारण हो सकती हैं। इसलिए इन्हें पहचाना और इनका इलाज करवाना जरूरी है। आज के समय में विभिन्न तरह की हेपेटाइटिस का बेहतरीन इलाज मौजूद हैं, अच्छी दवाएं उपलब्ध हैं जो कि बीमारी को नियंत्रित कर सकती हैं। हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण भी मौजूद है, इसका टीका लगवा लेने से बहुत हद तक सुरक्षा मिल सकती है। लिवर को स्वस्थ्य रखने के लिए अल्कोहल और स्मोकिंग से दूर रहें।
मेदांता में है एक ही छत के नीचे जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा उपलब्ध : डॉ संगीत सौरभ कहते हैं कि मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रांची में पेट और लिवर संबंधित बीमारियों की जांच से लेकर इलाज तक की बेहतर व्यवस्था है। यहां अल्ट्रसाउंड से लेकर इंडोस्कोपी जांच तक एक ही छत के नीचे मौजूद है। यहां अनुभवी डॉक्टरों द्वारा आधुनिक तकनीक से इलाज किया जाता है। पेट एवं लिवर संबंधी गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज अब मेदांता अस्पताल रांची में हो सकता है।