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दुनिया में बढ़ रहे कोरोना के मामले, लेकिन भारत में कम हो रहे केस

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दुनिया में बढ़ रहे कोरोना के मामले, लेकिन भारत में कम हो रहे केस
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एबीएन हेल्थ डेस्क। ओमिक्रॉन के एक सब-वेरिएंट BA.2 की वजह से पूरी दुनिया में कोविड-19 के मामलों की संख्या में एक बार फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। मौजूदा वेरिएंट पिछले वेरिएंट से अधिक संक्रामक है। बीते एक हफ्ते के दौरान पूरी दुनिया में इसकी मरीजों की संख्या रोजाना 12 फीसदी की दर से बढ़ रही है और यह 18 लाख तक पहुंच गई है। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, पश्चिमी देशों में नई मामलों की संख्या ज्यादा देखी जा रही है। दूसरी ओर, भारत में नई मामलों की संख्या कम हो रही है। शनिवार को, भारत में 3 हजार से कम कोविड केस दर्ज किए गए, ऐसा लगातार छठे दिन हुआ, जबकि दूसरे देश बढ़ते केस के कारण चिंतित हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कोविड के 2,075 मामले सामने आए हैं जिससे देश में एक्टिव मरीजों की संख्या घटकर 28 हजार से कम हो गई है, यह अब तक के कुल मरीजों की संख्या का 0.06 फीसदी हिस्सा है। कोविड के खिलाफ सुरक्षा उपायों में ढील न बरतने का फैसला पड़ोसी देशों में कोविड के बढ़ते मामलों को देख भारत ने इस वायरस के खिलाफ सुरक्षा उपायों में ढील न बरतने का फैसला किया है। शुक्रवार को स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा है कि कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करने के लिए सरकारें अपनी पांच रणनीति- टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, वैक्सीनेट और निर्देशों के पालन पर ध्यान देते रहें। गहन निगरानी के तहत, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी और गंभीर श्वसन संक्रमण वाले भर्ती किए गए मरीजों का फिर से कोरोना टेस्ट किया जाएगा और पॉजिटिव पाए जाने पर जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नमूने भेजे जाएंगे। क पत्र में, भूषण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि नए वेरिएंट का सही समय पर पता लगाने के लिए INSACOG नेटवर्क को पर्याप्त संख्या में नमूने जमा किए जाएं। ILI और SARI मामलों में पर्याप्त टेस्टिंग करना सरकार के लिए कोविड के प्रबंधन के लिए काफी अहम रहा है। भूषण ने कहा है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक रूप से सभी सावधानियां बरतनी चाहिए और आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ सुरक्षा उपायों का पर्याप्त ध्यान रखना है। राज्यों के लिए यह भी बहुत जरूरी है कि वे सभी लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए प्रेरित करें। बंगलुरु के एक अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ आदित्य एस चोवटी ने बताया कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के वजह से लोगों में इस बीमारी के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है, इसलिए अभी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा, क्लिनिकली देखा जाए तो ओमिक्रॉन की लहर बहुत अधिक गंभीर नहीं थी, इसके लक्षण भी गंभीर नहीं थे और इस लहर का पीक स्तर गुजर चुका है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि इस लहर से लोगों को आवश्यक प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त हो चुकी है। एक बार किसी विशेष वेरिएंट के खिलाफ हमारे शरीर में एंटीबॉडी तैयार हो जाती है, तो इससे हमें संक्रमण से बचने में मदद मिलती है या फिर यह बहुत हद तक गंभीरता को कम कर देती है। हालांकि, यह माना जाता है कि ओमिक्रॉन दोबारा संक्रमित कर सकता है। इस पर डॉ चोवटी का कहना है कि सबसे पहले हमें भर्ती होने के मामलों को कम से कम से रखना है और मृत्यु दर को नियंत्रण में रखना है। यदि हम ऐसा कर पाते हैं तो मुझे नहीं लगता कि ओमिक्रॉन की वजह से भारत को डरने की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन की रफ्तार और कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर को बनाए रखने की जरूरत है।
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