एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र के पुणे स्थित जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने शुक्रवार को भारत के पहले एमआरएनए (mRNA) कोरोना वैक्सीन के दूसरे और तीसरे फेज के टेस्टिंग डेटा को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को सौंप दिया है। कंपनी ने एक ओमिक्रॉन स्पेसिफिक वैक्सीन भी विकसित की है, जिसका इंसानों पर प्रभावकारिता और इम्यूनोजेनेसिटी के लिए परीक्षण किया जाएगा। दरअसल,जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स कंपनी देश का पहला एमआरएनए वैक्सीन विकसित कर रही है। जिसकी जानकारी सूत्रों के हवाले से की दी है। इससे पहले भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ भार्गव ने बताया कि यह टीका भविष्य में अन्य बीमारियों के इलाज में भी उपयोगी साबित होने वाला है और भारत वैक्सीन महाशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है।
भार्गव ने अपने बयान में कहा, भारत एक वैक्सीन सुपर पावर बनने की ओर बढ़ रहा है और यह फैक्ट कि ये टीके अन्य बीमारियों के लिए उपलब्ध होने जा रहे हैं। एमआरएनए वैक्सीन की अहमियत पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने कहा था कि वैक्सीन का यह एमआरएनए प्लेटफॉर्म आज कोरोना के मद्देनजर एक संपत्ति है और अन्य बीमारियों के लिए भी इससे परे है। यह मलेरिया, डेंगू या टीबी हो सकता है। ऐसी कई बीमारियां हैं जिनके लिए हम अभी भी सस्ती और प्रभावी टीकों की तलाश कर रहे हैं। बता दें कि जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने mRNA वैक्सीन के दूसरे और तीसरे फेज के डेटा पेश किए हैं। टीकों के बारे में सिफारिशें सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) द्वारा आकलन के बाद ही आएंगी।