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जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों की तत्काल समीक्षा हो, आम जनता को मिले राहत : सुरेश चंद्र अग्रवाल

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जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों की तत्काल समीक्षा हो, आम जनता को मिले राहत : सुरेश चंद्र अग्रवाल
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झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भेजा पत्र, मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता एवं अनुचित मूल्यवृद्धि पर रोक लगाने की मांग 

एबीएन सोशल डेस्क। जीवनरक्षक एवं आवश्यक दवाओं की बढ़ती कीमतों से आम जनता को राहत दिलाने तथा दवाओं के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था को पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाने की मांग को लेकर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया है। पत्र में दवाओं के उत्पादन मूल्य और खुदरा मूल्य के बीच भारी अंतर पर चिंता व्यक्त करते हुए कीमतों की तत्काल समीक्षा करने का आग्रह किया गया है। 

पत्र में कहा गया है कि महंगी दवाओं के कारण गरीब, मध्यमवर्गीय एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, किडनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए नियमित दवाओं का खर्च बड़ी चुनौती बन गया है। अनेक परिवार अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खर्च करने और कर्ज लेने को विवश हो रहे हैं।

सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक की मूलभूत आवश्यकता है। किसी भी व्यक्ति को आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए। दवा उद्योग की वास्तविक उत्पादन लागत, अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण खर्च को ध्यान में रखते हुए उचित लाभ की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अनुचित मूल्यवृद्धि का भार आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए। 

सम्मेलन की प्रमुख मांगें सम्मेलन ने केंद्र सरकार से जीवनरक्षक एवं आवश्यक दवाओं के उत्पादन मूल्य, आयात लागत, वितरण खर्च तथा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की तत्काल समीक्षा करने, मूल्य निर्धारण की पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने तथा उत्पादन लागत एवं खुदरा मूल्य के बीच अनुचित अंतर पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की मांग की है। 

इसके साथ ही गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा कर उचित मूल्य सीमा निर्धारित करने, गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं को प्रोत्साहित करने तथा जन औषधि केंद्रों को सशक्त बनाने का आग्रह किया गया है। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई एवं समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की भी मांग की गई है। 

सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि दवा कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन बचाने का आवश्यक साधन है। सरकार को मरीजों एवं आम नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दवाओं को सुलभ एवं किफायती बनाने के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

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