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दूध के दांतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी : डॉ पूर्णिमा

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दूध के दांतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी : डॉ पूर्णिमा
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छोटी उम्र से रखें दांतों की सेहत का ख्याल : डॉ पूर्णिमा 

बच्चों में तेजी से बढ़ रही कैविटी की समस्या, चिप्स-चॉकलेट से लेकर रात में बोतल लेकर सोने की आदत बन रही कारण 

एबीएन हेल्थ डेस्क (जमशेदपुर)। बच्चों की मुस्कान जितनी खूबसूरत होती है, उतनी ही जरूरी है उनके दांतों की सही देखभाल। आज बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और दांतों की सफाई में लापरवाही के कारण बच्चों में कैविटी समेत कई दंत समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर छोटे बच्चों में दूध के दांतों को लेकर अभिभावकों के बीच कई तरह की भ्रांतियां भी देखने को मिलती हैं। 

इन्हीं मुद्दों को लेकर एबीएन ने जमशेदपुर में साई जंबो टावर, भालूबासा में स्थित 32 स्माइल्स मल्टी स्पेशियालिटी लेजर डेंटल क्लीनिक की संस्थापक एवं वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. पूर्णिमा से विशेष बातचीत की। उन्होंने बच्चों में दांतों की आम समस्याओं, कैविटी के कारण, ब्रश करने की सही आदत और दूध के दांतों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। 

सवाल : आपके क्लिनिक में बच्चों में सबसे ज्यादा कौन सी समस्या देखने को मिलती है? 

डॉ. पूर्णिमा : बच्चों में सबसे ज्यादा दांतों में कीड़ा लगना यानी कैविटी की समस्या देखने को मिलती है। खासकर दो से छह वर्ष की उम्र के बच्चों के आगे के दांतों में काले धब्बे और सड़न आम है। इसके अलावा दांतों का टेढ़ा-मेढ़ा आना और दूध के दांतों का समय से पहले टूट जाना भी काफी सामान्य समस्या है।

सवाल : क्या बच्चों में कैविटी के मामले बढ़ रहे हैं? 

डॉ. पूर्णिमा : हां, कैविटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसमें बदली हुई जीवनशैली की भूमिका है। चिप्स, बिस्किट, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट जूस का अधिक सेवन, रात में दूध की बोतल लेकर सोना और समय पर ब्रश नहीं करना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। 

सवाल : क्या रोज ब्रश करने के बावजूद कैविटी हो सकती है? 

डॉ. पूर्णिमा : बिल्कुल। केवल ब्रश करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही तरीके से ब्रश करना भी जरूरी है। दिन में सिर्फ एक बार ब्रश करना, जल्दी-जल्दी ब्रश खत्म कर देना, मीठा खाने के बाद कुल्ला नहीं करना और अत्यधिक मीठा खाना भी कैविटी का कारण बन सकता है। बच्चों को सुबह और रात में करीब दो मिनट तक सही तरीके से ब्रश करवाना चाहिए।

सवाल : माता-पिता की कौन सी लापरवाही बड़ी समस्या बन जाती है? 

डॉ. पूर्णिमा : सबसे बड़ी गलती यह सोचने की है कि दूध के दांत तो गिर ही जाएंगे, इसलिए उनका इलाज कराने की जरूरत नहीं है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को अकेले ब्रश करने के लिए छोड़ दिया जाता है। करीब आठ वर्ष तक बच्चों को माता-पिता की निगरानी में ब्रश करवाना चाहिए। इसके अलावा हर छह महीने में दांतों की जांच नहीं करवाना भी समस्या को बढ़ा सकता है। 

सवाल : बच्चों का दांतों के इलाज से डर कैसे कम किया जा सकता है? 

डॉ. पूर्णिमा : बच्चों को प्यार से समझाना सबसे जरूरी है। उन्हें यह कहकर कभी नहीं डराना चाहिए कि डॉक्टर सुई लगायेंगे या बहुत दर्द होगा। पहली बार बच्चे को केवल जांच और क्लिनिक के वातावरण से परिचित कराने के लिए लाना अच्छा रहता है। बच्चे को इलाज की प्रक्रिया समझाने और सहज माहौल देने से उसका डर कम किया जा सकता है। 

सवाल : दूध के दांत समय से पहले निकलने से क्या पक्के दांत प्रभावित होते हैं? 

डॉ. पूर्णिमा : दूध के दांत पक्के दांतों के लिए जगह बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि दूध का दांत समय से पहले निकल जाता है तो आसपास के दांत उस खाली जगह में खिसक सकते हैं। इससे बाद में पक्का दांत टेढ़ा-मेढ़ा निकलने की समस्या हो सकती है और कुछ मामलों में आगे चलकर ब्रेसेस की जरूरत पड़ सकती है। 

सवाल : बच्चों की डाइट और दांतों की सफाई में किसे अधिक महत्व देंगी? 

डॉ. पूर्णिमा : दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को चिपचिपी और अत्यधिक मीठी चीजें कम देनी चाहिए। फल, हरी सब्जियां, दूध, पनीर और दही जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ आहार में शामिल किए जा सकते हैं। सुबह और रात दो मिनट तक अच्छी तरह ब्रश करवाएं और विशेष रूप से रात का ब्रश कभी न छोड़ें। छोटी उम्र से अच्छी आदतें विकसित करना ही बच्चों के दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की कुंजी है।

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