एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमितों को नयी समस्या से जूझना पड़ रहा है। यह समस्या खांसी और कफ की है। बुखार तो दो दिनों में उतर जा रहा है, लेकिन खांसी निगेटिव होने के बावजूद रहती है। चिकित्सकों का मानना है कि मौसम के बदलने से खांसी और कफ कायम है। उनके अनुसार इसमें सर्वाधिक आवश्यकता परहेज की है। बुखार उतरने के बाद हमें लगता है कि हम ठीक हो गए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। बुखार में भी जिस तरह से परहेज कर रहे थे, उसके बाद कम से कम पांच दिनों तक परहेज की जरूरत है। चिकित्सकों ने बताया कि अधिकतर मरीजों को वे लोग कम समय के लिए ही दवा देते हैं, क्योंकि वायरल की एक अवधि है। मरीजों में सहनशीलता नहीं है। वे लोग चिकित्सक से दिखाने या सलाह लेने के बाद मेडिकल स्टोर में जाकर अपने मन से दवा ले रहे हैं, जो उनके लिए ठीक नहीं। कुछ संक्रमितों में यह देखने को मिल रहा है कि उनमें सीआरपी व डी डीमर जल्दी कम नहीं हो रहा है, लेकिन ऐसे मरीजों की संख्या कम है। कुछ लोग स्वत: सीआरपी, सीबीसी और डी डाइमर की जांच करा ले रहे हैं, जो ठीक नहीं। वे लोग कोरोना की दूसरी लहर से डरे हुए हैं। इससे बचने की जरूरत है। ठीक हुए मरीजों की आपबीती अब तक खांसी है। पहले ही दिन से थी। बाद में जांच कराने पर पॉजिटिव निकला। बुखार दो दिनों में ठीक हो गया, लेकिन खंसी अब भी है।