रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने की तैयारी
एबीएन हेल्थ डेस्क। झारखंड में टीबी और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग अब एआई और रोबोटिक तकनीक के उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
इसी सिलसिले में सोमवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मेरील कंपनी के साथ एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में टीबी मुक्त भारत, सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत, ड्रग एब्यूज नियंत्रण तथा रोबोटिक स्किल लैब की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान मेरील कंपनी के अधिकारियों ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति (पीपीटी) के माध्यम से बताया कि आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से सर्वाइकल कैंसर की शुरूआती पहचान आसान हो सकती है। इसके लिए किसी महंगी मशीन की जरूरत नहीं होगी और एएनएम स्तर की स्वास्थ्यकर्मी भी इस जांच को कर सकेंगी। प्रारंभिक जांच के बाद आवश्यकता पड़ने पर आरटीपीसीआर टेस्ट के माध्यम से इसकी पुष्टि की जा सकेगी।
प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि टीबी की पहचान के लिए एआई आधारित एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक्स-रे में संदिग्ध मामला सामने आने पर आगे आरटीपीसीआर जांच की जाएगी, जिससे ड्रग रेजिस्टेंस का भी पता लगाया जा सकेगा।
बैठक में रोबोटिक सर्जरी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक से सर्जरी अधिक सटीक होगी और इसमें ब्लड लॉस कम होने के साथ मरीज का रिकवरी समय भी कम होगा। इस तकनीक से जनरल सर्जरी, कैंसर सर्जरी, स्त्री रोग, यूरोलॉजी, ईएनटी, कार्डियक और आथोर्पेडिक सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाएं भी की जा सकती हैं।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने प्रस्तुति देखने के बाद निर्देश दिया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रिम्स, रांची में इस तकनीक का प्रशिक्षण शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि रोबोटिक तकनीक से जुड़ी लागत का आकलन कर उसकी तुलना आयुष्मान भारत योजना और सीजीएचएस पैकेज की दरों से की जाये।
सर्जरी के लिए कास्ट आधारित पैकेज बनाने का निर्देश
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सर्जरी के प्रकार के आधार पर प्रत्येक सर्जरी का कास्ट आधारित पैकेज तैयार किया जाए और इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावना देखी जाए। उन्होंने कहा कि विभाग इस कास्ट आधारित पैकेज का अध्ययन करेगा और यह देखा जाएगा कि इसे आयुष्मान भारत योजना के पैकेज के आधार पर लागू किया जा सकता है या फिर सीजीएचएस की दरों के अनुसार लागू किया जाए।
उन्होंने कंपनी को विभिन्न प्रकार के रोबोटिक सिस्टम की लागत और उपयोगिता का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने को कहा और इसके लिए एक महीने का समय दिया। इसके बाद पुन: बैठक कर प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में अपर मुख्य सचिव के साथ छवि रंजन, कार्यकारी निदेशक झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी, शशि प्रकाश झा, अभियान निदेशक एनएचएम, विद्यानंद शर्मा पंकज, संयुक्त सचिव स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, डॉ (प्रो) हीरेंद्र बिरूवा, चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स और प्रो पंकज बोदरा, एचओडी, सर्जरी, रिम्स सहित मेरील कंपनी के कई अधिकारी उपस्थित थे।