टीम एबीएन, रांची। झारखंड में फाइलेरिया यानी हाथीपांव उन्मूलन को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में नेपाल हाउस स्थित अपर मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में स्टेट टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आहूत बैठक में 10 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम की रणनीति, चुनौतियों और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम पर भी चर्चा की गयी। इस बैठक में अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा, उप निदेशक डॉ लाल माझी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, विश्व स्वास्थ्य संगठन और पीरामल स्वास्थ्य के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
फाइलेरिया का बढ़ता बोझ, उन्मूलन की चुनौती
बैठक में प्रस्तुति के क्रम में बताया गया कि फाइलेरिया एक गंभीर परजीवी रोग है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलता है। दुनिया के 72 देश लिम्फेटिक फाइलेरिया से प्रभावित हैं, जहां 88.8 करोड़ लोग जोखिम में हैं। भारत में अब तक लगभग 6 लाख लिम्फोडेमा और 2 लाख हाइड्रोसील मरीज चिह्नित किये गये हैं।
झारखंड में 57,436 लिम्फोडेमा मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं। राज्य में फाइलेरिया के उन्मूलन को लेकर सरकार ने इसे मिशन मोड में चलाने का निर्णय लिया है।
एमडीए-2026: लक्ष्य और कवरेज
10 फरवरी 2026 से राज्य के 14 जिलों—बोकारो, देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, कोडरमा, लोहरदगा, पाकुड़, रामगढ़, रांची, साहेबगंज और सिमडेगा के 87 चिह्नित प्रखंडों के 14,496 गांवों में एमडीए कार्यक्रम संचालित किया जायेगा। इसके अंतर्गत लगभग 1.75 करोड़ आबादी को फाइलेरिया रोधी दवाएं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में सेवन कराने का लक्ष्य रखा गया है।
झारखंड की पहल
इस क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई पहल शुरू की हैं। लिम्फोडेमा मरीजों के उपचार हेतु 215 कार्यशील एमएमडीपी क्लिनिक हैं जहां समुचित इलाज मिल सकेगा। 5053 मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है और 1714 हाई-प्रायोरिटी गांव चिह्नित किये गये हैं। पंचायत स्तर पर 230 एमडीए मिशन स्क्वाड का गठन किया गया है और 289 सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी इसमें होगी। बेहतर मानिटरिंग के लिए राज्य मुख्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गयी है, जहां गूगल शीट के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है।
जन आंदोलन बनाने की अपील
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एमडीए के दौरान केवल दवा वितरण नहीं, बल्कि दवा सेवन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि यदि समुदाय के सभी पात्र लोग लगातार 5 वर्षों तक वर्ष में एक बार दवा का सेवन करें, तो झारखंड से फाइलेरिया का उन्मूलन संभव है। उन्होंने सभी विभागों से इसे जन आंदोलन के रूप में लेने और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से समुदाय को जागरूक करने की अपील की।