कई परिवारों की जिंदगी हुई रोशन
टीम एबीएन, रांची। रांची के रिम्स अस्पताल में 40वें नेशनल आई डोनेशन फोर्टनाइट के दिन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह उन परिवारों के सम्मान में किया गया, जिन्होंने अपनों की आंखों को दान करके दूसरों की जिंदगी को रोशन किया है। इस कार्यक्रम में कई परिवार ऐसे थे, जिन्होंने समय से पहले अपनों को खो दिया था। यही वजह रही कि इस कार्यक्रम के दौरान उन परिवारों की आंखें नम दिखीं।
हालांकि, भले ही परिवार के सदस्यों के आंखों में अपने को खोने का गम था, पर साथ ही साथ उनमें किसी और के जीवन के अंधेरे को रोशन कर देने की खुशी भी दिखाई दी। नामकुम में रहने वाली ज्योति कश्यप, जिन्होंने अपने भाई को एक एक्सीडेंट में खो दिया था। लेकिन उनके परिवार ने लिटा निर्मल कुजूर नाम के युवक को अपने भाई की आंखों को दान करके मदद की।
ऐसे में दोनों ही परिवार समारोह में भावुक नजर आये। ऐसा ही एक और परिवार है, जिसमें कीर्ति सिन्हा नाम की युवती ने अपनी मां को तबीयत खराब होने की वजह से खो दिया। लेकिन इस गम और अंधेरे वाले माहौल में भी उन्होंने दूसरों के जीवन में रोशनी भरना ज्यादा सही समझा। उनके लिए यह गर्व की बात है। नेत्रदान का यह फैसला उतना आसान नहीं, जितना सुनने में लगता है।
यह फैसला लेकर परिवार वालों ने यकीनन एक हौसला दिखाया। इसके साथ ही लोहरदगा जिले के रहने वाले कैलाश मुंडा ने कहा कि भले ही उनकी बीवी उन्हें छोड़ कर चली गयी पर उनकी बीवी की आंखें अब भी जिंदा हैं। वहीं कैलाश मुंडा के बेटे भी अपने पिता के इस फैसले से काफी गौरव महसूस करते हुए दिखाई दिये। उनका यह भी कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह भी भविष्य में नेत्रदान जरूर करेंगे।
मामले की जानकारी देते हुए अस्पताल के अंगदान विभाग के अध्यक्ष ने बताया कि पिछले 3 साल में तकरीबन 500 से अधिक लोगों ने नेत्रदान किया है और दूसरे लोगों की जिंदगी का अंधेरा दूर किया है। इसलिए अंधेरे को कोसने से अच्छा है कि हम एक दीया जलायें। रांची में कई परिवारों ने नेत्रदान कर इस मुहिम को बल दिया है।