मानसिक स्वास्थ्य: जिसे भारत में सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाता है, वही सबसे जरूरी है
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है। फिर भी, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में चुप्पी, शर्म और डर बना हुआ है। लोग डॉक्टर के पास सिरदर्द के लिए तो जाते हैं, लेकिन अंदर के दर्द को छिपा जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, डिप्रेशन वर्ष 2030 तक दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी बनने जा रही है।
सामान्य लक्षण
- लगातार उदासी या अकेलापन
- रोजमर्रा के कामों में रुचि की कमी
- बार-बार सिरदर्द या थकान
- नींद की समस्या
- आत्मविश्वास में गिरावट या आत्महत्या के विचार
- सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन
- क्रॉनिक तनाव के कारण कोर्टिसोल का उच्च स्तर
- सोचने, निर्णय लेने और याद रखने की क्षमता में गिरावट
बचाव और समाधान
- 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी से ब्रेन में एंडोर्फिन बढ़ता है — जो नेचुरल मूड बूस्टर है
- 7-8 घंटे की नींद मस्तिष्क की मरम्मत और भावनात्मक संतुलन के लिए जरूरी है
- संतुलित आहार में ओमेगा-3, विटामिन इ12, और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व जरूरी हैं
- मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग से एक्टिविटी कम होती है — यानी स्ट्रेस घटता है
- मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से परामर्श लें — यह पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रभावशाली उपाय है
- अब समय आ गया है कि भारत मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही प्राथमिकता दे, जितनी दिल, दिमाग और हड्डियों को दी जाती है।
- खुद से प्यार की शुरुआत — अपने मन का इलाज करने से होती है।