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अल्सर बन सकता है आंतो में कैंसर का कारण : महेश पाल

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अल्सर बन सकता है आंतो में कैंसर का कारण : महेश पाल
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बचाव के लिए हमेशा करें योग प्राणायाम

एबीएन हेल्थ डेस्क। अल्सर एक प्रकार का घाव या छाला है जो शरीर की अंदरूनी सतहों पर बनता है। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि  यह आमतौर पर पेट की अंदरूनी परत, छोटी आंत या ग्रासनली (इसोफेगस) में होता है। पेट में बनने वाला एक्स्ट्रा एसिड गैस्ट्रिक अल्सर का मुख्य कारण है अल्सर का यदि समय पर सही इलाज न किया जाये तो यह आंतों में कैंसर का कारण भी बन सकता है। 

अल्सर तब होता है जब पेट में बनने वाला अम्ल (एसिड) इन आंतरिक सतहों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे छाले या घाव हो जाते हैं, जो पेट, आहार नाल या आंतों की अंदरूनी सतह पर विकसित होते हैं, जिस जगह पर अल्सर होता है उसके आधार पर इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे पेट में होने वाले अल्सर को गैस्ट्रिक अल्सर कहा जाता है।

उसी तरह छोटी आंत के अगले हिस्से में होने वाले अल्सर को डुओडिनल अल्सर कहा जाता है, गैस्ट्रिक अल्सर, जिसे पेट का अल्सर भी कहा जाता है, पेट की आंतरिक परत में होने वाला एक घाव या छाला है। यह तब होता है, जब पेट की म्यूकस परत कमजोर हो जाती है और पेट के अम्ल द्वारा क्षतिग्रस्त हो जाती है, अल्सर को बढ़ावा देने के लिए हेलीकोवेक्टर पाईलोरी बैक्टीरिया भी जिम्मेदार माना जाता है।

यह बैक्टीरिया पेट की म्यूकस परत को कमजोर करता है, जिससे पेट का अम्ल (एसिड) आंतरिक परत को नुकसान पहुंचाता है, बही दूसरी और नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, एस्पिरिन और नेप्रोक्सेन का लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन करने से अल्सर हो सकता है। ये दवाएं पेट की सुरक्षा करने वाली म्यूकस परत को कमजोर करती हैं। 

जब हम अल्सर से ग्रसित होते हैं तो हमारे सामने कई समस्याओं उत्पन्न होती हैं जिसमें अल्सर से पेट और छोटी आंत की दीवार में छेद हो जाता है इससे पेट की गुहा में गंभीर संक्रमण हो सकता है। आंतरिक रक्तस्राव  रक्तस्राव के कारण धीरे-धीरे रक्त की कमी से एनीमिया हो सकता है, जबकि गंभीर रक्त हानि के लिए रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है।

गंभीर मामलों में खूनी उल्टी, मल में रक्त आना पेप्टिक अल्सर पाचन तंत्र को अवरुद्ध कर देता हैं, जिससे हम बिना किसी संभावित स्पष्टीकरण के आसानी से भरा हुआ महसूस कर सकते हैं, बार-बार सीने में जलन, वजन तेजी से घटने,  गैस बनना, भूख न लगना आदि पेट में अल्सर होने के ही कारण है।

जब हमें यह महसूस होता है कि हमें अल्सर धीरे-धीरे हमारे शरीर में हो चुका है तो उसके कई लक्षण हमारे सामने नजर आते हैं जिसमें रात में, खाली पेट या खाने के कुछ समय बाद तेज दर्द, गैस और खट्टी डकार, उल्टी, पेट के उपरी हिस्से में दर्द, पेट का भारीपन, भूख में कमी, वजन घटना, सुबह-सुबह हल्की मितली, अल्सर होने के पीछे के कारण नजर सामने आते हैं।

जिसमें हेलीकोवेक्टर पाईलोरी बैक्टीरिया, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, तनाव- चिंता, मसालेदार व तला हुआ भोजन, अवस्थित दिनचर्या व भोजनचर्या आदि, अल्सर व अल्सर से होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए योग-प्राणायाम काफी उपयोगी साधन के रूप में है जिससे हम अपने शरीर को अल्सर व अन्य होने वाली बीमारियों से बचा सकते हैं जिसमें अल्सर से बचाव के लिए,पवनमुक्त आसन  यह आपके पेट में जमा होने वाली सभी गैसों से छुटकारा पाने में मदद करता है और अल्सर के प्रभाव से बचाता है। 

अर्द्धमत्येंद्रासन का अभ्यास हेलीकोवेक्टर पाईलोरी बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाता है जो अल्सर होने के लिए जिम्मेदार है, नाड़ी शोधन प्राणायाम  तनाव व चिंता से बचाव करता है, कपालभाति के अभ्यास से आंतो को ऊर्जा मिलती है और पाचन तंत्र व कब्ज की समस्या से राहत मिलती है, यह अभ्यास  आंतो को स्वस्थ बनाता है, यदि हमें कोई गंभीर शारीरिक रोग है तो उसके लिए योग अभ्यास के द्वारा हम धीरे-धीरे ठीक कर सकते हैं लेकिन योग अभ्यास योगाचार्य, योग गुरु के ही मार्गदर्शन में ही किया जाये, जिससे हमें योग का पूरा लाभ मिल सके।

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