एबीएन हेल्थ डेस्क। राग, रंग, उल्लास और हुड़दंड का त्योहार होली 21 मार्च को है। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इस रंगीन त्योहार को पसंद करते हैं और एक-दूसरे के साथ रंग-गुलाल खेल कर और खा-पीकर इसे मनाते हैं।
पहले के समय में होली पारंपरिक तरीके से मनायी जाती थी, जिसमें प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों का प्रयोग होता था, लेकिन आजकल मिलावटी व सिंथेटिक रंगों का प्रचलन काफी अधिक बढ़ गया है। ऐसे रंग हमारी त्वचा, आंखों, नाखून, बाल एवं आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
इन रासायनिक रंगों से त्वचा पर खुजली, दाने, एलर्जी, एग्जिमा, ब्रेकआउट आदि होने लगता है। लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर हम होली का त्योहार मस्ती और हर्षोल्लास के साथ मना सकते हैं।
- हमेशा प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों से ही होली खेलें।
- गीले रंगों की जगह सूखे रंगों का प्रयोग करें।
- होली खेलने से पहले शरीर की खुली त्वचा जैसे कि चेहरे, गर्दन, हाथ-पांव के पीछे मॉइश्चराइजर या ऑलिव ऑयल को अच्छे से लगा कर उसके ऊपर सनस्क्रीन अवश्य लगायें।
- होंठों पर सनस्क्रीन युक्त लिप बाम तथा नाखून पर नेल पॉलिश लगाना मत भूलिये।
- बालों को धोकर सुखाकर तेल लगायें और अच्छी तरह से बांध लें, हमेशा पूरे गहरे रंग के सूती कपड़े पहने
- आभूषण पहन कर होली ना खेलें।
- आंखों को बचाने के लिए सनग्लास लगायें।
- ज्यादा देर तक रंगों को शरीर पर न रहने दें। अधिक देर तक धूप में रंग न खेलें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पियें और खानपान का ध्यान रखें।
- अगर आप अस्थमा या एक्जिमा के मरीज हैं, तो रंगों से दूर ही रहें।
- रंगों को छुड़ाने में हड़बड़ी न करें। अधिक साबुन, सोदा, केरोसिन आदि का प्रयोग ना करें।
- दही-बेसन, एलोवेरा आदि की मदद से रंगों को छुड़ायें।
किसी भी तरह की तकलीफ होने पर स्वयं इलाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में चर्म रोग विशेषज्ञ से अवश्य मिलें।