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हार्ट अटैक आने पर जान बचाने में सीपीआर का अहम रोल : डॉ तापस साहू, मेदांता हाॅस्पिटल रांची

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हार्ट अटैक आने पर जान बचाने में सीपीआर का अहम रोल : डॉ तापस साहू, मेदांता हाॅस्पिटल रांची
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टीम एबीएन, रांची। बदलते दौर में हर्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अगर वक्त पर उपचार ने हो तो ये खतरनाक भी साबित हो सकता है। उम्मीद की एक किरण यह भी है कि हर्ट अटैक के खतरे से बाहर निकालने में सीपीआर एक अहम रोल निभाता है। मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू का कहना है कि अगर किसी को हर्ट अटैक आता है और वक्त पर सीपीआर दे दिया जाए तो मरीज की जीवन को बचाया जा सकता है।

मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने बताया कि आम बोलचाल की भाषा में कार्डियोपलमनरी रिससिटेशन को सीपीआर कहा जाता है। दरअसल, यह इमरजेंसी मेडिकल तकनीक है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति की सांस, दिल के रुक जाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। यह हर्ट के बंद होने के बाद फिर चालू करने की प्रक्रिया है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि अगर हम किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत होती है। जैसे कि अगर किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो प्रति मिनट 100 - 120 सीपीआर देना चाहिए। दबाव का ख्याल रखना चाहिए। 30 सीपीआर देने के साथ ही दो बार सांस भी देना चाहिए। प्रति दो मिनट में पांच साइकिल पूरा होना चाहिए। एक साइकिल में तीस सीपीआर होना चाहिए। वो कहते हैं, सीपीआर के साथ ही डिफिब्रिलेटर मशीन की भी जरूरत पड़ती है। इससे मरीज की जान को बचाए जाने की संभावना और बढ़ जाती है। सीपीआर और ऑटोमेटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर मशीन अगर मिल जाए तो लोगों की जान बचाई जा सकती है।

मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने कहा कि सीपीआर देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित हो जाने के बाद इसे आम आदमी भी दे सकता है। पोस्ट कोविड ऐसी घटनाएं बढ़ गई है। दरअसल कोरोना फेफड़े पर असर डालने के साथ-साथ शरीर के और भी कई अंगों पर अपना दुष्प्रभाव डालता है। 
जिससे हार्टअटैक की घटनाएं बढ़ गई है। हर्ट अटैक न हो, इसके लिए खुद को भी कुछ चीजों पर ध्यान रखना होगा। अगर वजन ज्यादा है तो कंट्रोल करना होगा। मधुमेह के रोगी हैं तो भोजन संतुलित करना होगा साथ ही दवा और इन्सुलिन लेते रहना चाहिए। हरी सब्जी और फल का ज्यादा सेवन लाभदायक होगा। बीपी पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। भोजन में तेल व वसा का जितना कम प्रयोग होगा, उतना बेहतर होगा। इसके अलावा टहलना एक बेहतर माध्यम है। सप्ताह में अगर कम से कम 150 मिनट ब्रिस्क वॉक करते हैं तो इससे खुद को फिट रखा जा सकता है।

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