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सामाजिक सतर्कता और वक्त पर इलाज ही न्यूमोनिया से बचाव : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय

सामाजिक सतर्कता और वक्त पर इलाज ही न्यूमोनिया से बचाव : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय
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टीम एबीएन, रांची। न्यूमोनिया फेफड़ों का इंफेक्शन है। अगर वक्त रहते इसका इलाज किया जाये, तो मरीज का बचाव संभव है। विश्व निमोनिया दिवस पर मेदांता रांची की एसोसिएट कंसलटेंट डॉक्टर देवदत्ता बंदोपाध्याय ने न्यूमोनिया के प्रति आगाह करते हुए यह बातें कही। डॉ देवदत्ता ने बताया कि न्यूमोनिया के होने के कई कारण है। यह बैक्टीरिया वायरस, इन्फ्लूएंजा, कोविड, फंगल इनक्शन जैसे कारणों से होता है। आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में न्यूमोनिया एक लीडिंग कॉज आॅफ डेथ में गिना जाता है। वैसे लोग जिनको हर्ट डिजीज, क्रॉनिक लंग डिजीज, दमा, सीओपीडी, किडनी के पेशेंट, कैंसर के पेशेंट को ज्यादा खतरा होता है वैसे व्यक्ति जिनको दमा है उनको निमोनिया होने का खतरा अन्य से छह से सात गुना ज्यादा बढ़ जाता है। उनका कहना था कि न्यूमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसे वक्त पर अगर इसका इलाज किया जाए तो इससे पूरी तरीके से बचाव किया जा सकता है। न्यूमोनिया को कंट्रोल करने के लिए एजुकेशन और अवेयरनेस बहुत जरूरी है। कोई भी अगर अपने निमोनिया के लक्षणों पर ध्यान रखें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें तो इससे बचाव संभव है। इसके लक्षणों में बुखार आना, खांसी, सांस फूलना, हाथ, पैर व मुंह में नीलापन, बहुत तेजी से सांसों का चलना होता है। कभी-कभी वैसे लोग जो पूरी तरीके से चेतना में नहीं होते हैं। उनको सुस्ती या बेहोशी जैसा अनुभव होता है। वो भी न्यूमोनिया का लक्षण हो सकता है। मौसम में हो रहे बदलाव पर डॉ देवदत्ता ने बताया कि ठंड के मौसम में निमोनिया होने के चांसेस ज्यादा हो जाते हैं। एक तो मौसम में बदलाव रहता है दूसरा इस मौसम में सीजनल वायरल फीवर भी लोगों को होता है। ठंड के मौसम में कई बार लोग रेगुलर एक्सरसाइज नहीं करते हैं या फिर सूर्य के धूप से दूर रहते हैं। पानी कम पीते हैं। ऐसे लोगों को निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है। कई बार लोग सर्दी जुकाम को नजरअंदाज भी कर देते हैं कि मौसम में बदलाव से ऐसा हो सकता है। इस मौसम में इन सारी बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। कई ऐसे वैक्सीन भी हैं जिनको लेने से न्यूमोनिया से बचाव किया जा सकता है। ये वैक्सीन हाई रिस्क पेशेंट, बुजुर्गों और बच्चों को लगाया जाता है जिससे इस गंभीर बीमारी से बचाव हो सके। मेदांता में निमोनिया के बेहतर इलाज के बारे में डॉक्टर का कहना था कि हमारे यहां बेहतर ओपीडी और आईपीडी की सेवा है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त आईसीयू, प्रतिदिन निमोनिया के पेशेंट का ख्याल रखना, क्रिटिकल निमोनिया पेशेंट के लिए आईपीडी सर्विसेज की सुविधा है। मेदांता न्यूमोनिया को लेकर वक्त वक्त पर जागरूक भी करता है।
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