एक्सीडेंट के बाद अगले 6 घंटे मरीज के लिए बेहद अहम : डॉ आनंद कुमार झा, मेदांता रांची
ABN Bureau• 29 Oct, 2022
1 Views
विज्ञापन
टीम एबीएन, रांची। मेदांता हॉस्पिटल, रांची के कंसलटंट न्यूरो सर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा ने वर्ल्ड ट्रॉमा डे के अवसर पर बताया कि हर साल बड़ी संख्या में सड़क हादसे में लोग अपनी जान गवां बैठते हैं। लोगों को अगर हादसे के बाद सही वक्त पर ट्रीटमेंट दिया जाए तो बहुत संभव है कि इन आंकड़ों में भी सुधार हो सकता है। अगर किसी मरीज की दुर्घटना हो जाती है तो शुरुआती 6 घंटे बहुत मायने रखते हैं। अगर इन 6 घंटे में मरीज का इलाज किया जाए तो उसकी जान बचायी जा सकती है। मेदांता हॉस्पिटल, रांची में ऐसे मरीजों के इलाज की विशेष सुविधा है।
वर्ल्ड ट्रॉमा डे के बारे में डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि इस डे को मनाए जाने का उद्देश्य प्रिवेंशन और अवेयरनेस होता है। विशेष रूप से एक्सीडेंट से कैसे बचे? यदि अगर कोई टू व्हीलर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसके लिए हेलमेट बहुत जरूरी होता है। अवेयरनेस के कारण जो ड्राइविंग करते हैं, वह तो हेलमेट लगाते ही हैं लेकिन जो पीछे बैठते हैं। हेलमेट उनके लिए भी ज्यादा जरूरी है। ट्रैफिक रूल को फॉलो करना भी बहुत जरूरी होता है। अगर कोई फोर व्हीलर का यूज कर रहा है तो सीट बेल्ट का उपयोग जरूर करें। यह अनिवार्य है।
डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि अगर दुर्भाग्य से घटना हो जाती है तो सबसे पहले इस चीज को देखा जाता है कि मरीज में जान बची है या नहीं ? उसमें पल्स की स्पीड देखनी होती है। मरीज को वाहन की सहायता से नजदीक के हॉस्पिटल में लेकर जाना होता है। इसमें कुछ सावधानी अपनाने की जरूरत होती है। मरीज को ले जाने के वक्त सीधा लिटा कर ली जाए। इस बात का ख्याल रखना होता है अगर मुंह से खून निकल रहा है या उल्टी जैसा लग रहा है तो उसे थोड़ा करवट दे सकते हैं। उसके जो भी नजदीकी हॉस्पिटल है उसमें मरीज को शिफ्ट किया जा सकता है। वह बताते हैं कि दुर्घटना होने के बाद जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी ट्रीटमेंट देने की जरूरत होती है। लेकिन 6 घंटे बहुत अहम माने जाते हैं।
मेदांता हाॅस्पिटल, रांची में 24 घंटे और सातों दिन इमरजेंसी और ट्रॉमा विभाग कार्यरत रहता है।
डॉक्टर आनंद कुमार झा यह भी बताते हैं कि सड़क हादसे में सबसे अहम ब्रेन को बचाना होता है। अगर ब्रेन में गहरी चोट लगे तो पेशेंट की मौत ऑन द स्पॉट भी हो सकती है। इसके अलावा छाती या पेट का चोट भी घातक हो सकता है। अगर छाती में चोट लगती है तो तुरंत सिक्योर करने की जरूरत होती है। पेट में चोट लगने से ब्लड लॉस होने के चांसेस ज्यादा होते हैं। मेदांता हॉस्पिटल रांची में विश्वस्तरीय इलाज की व्यवस्था है, जिससे हादसे के शिकार मरीजों का बेहतर इलाज होता है।
वर्ल्ड ट्रॉमा डे के मौके पर डॉक्टर आनंद कुमार झा यह कहते हैं कि कुछ सावधानी जरूर रखे। ड्राइविंग के वक्त हेलमेट का इस्तेमाल जरूर करें साथ ही हेलमेट को प्रॉपर टाइ करें। ड्राइविंग के वक्त मोबाइल पर कभी बातें न करें और ट्रैफिक रूल को जरूर फॉलो करें। ज्यादातर खुद की गलती से नहीं बल्कि दूसरों की गलती से एक्सीडेंट होता है। अगर आप सही हैं तो फिर दूसरे भी सही रहेंगे। अगर लोग यह सोच ले कि ट्रैफिक रूल का पालन करेंगे और गाड़ी को सही चलायेंगे, तो ऐसी नौबत शायद नहीं आयेगी।