एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका में आर्थिक संकट काफी ज्यादा गहराया हुआ है और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे मे देश की संसद को बता दिया है, कि अब श्रीलंका दिवालिया हो चुका है। वहीं, देश में राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो चुका है और राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों के घुसने के बाद राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे भाग चुके हैं और उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि वो 13 जुलाई को अपना इस्तीफा दे देंगे। वहीं, श्रीलंका के खराब हालत के बीच अब अमेरिका की एंट्री हुई है और अमेरिका ने कहा है कि वो असंतुष्टों को संतुष्ट करने की कोशिश करेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका ने श्रीलंका के राजनेताओं से आगे आने और लोगों के असंतोष को दूर करने के लिए दीर्घकालिक समाधान प्राप्त करने के लिए "जल्दी से काम" करने का आग्रह किया है। देश ने शनिवार की हिंसा की आलोचना की, लेकिन प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर किसी भी हमले को लेकर श्रीलंकाई बलों को चेतावनी भी दी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष या आईएमएफ ने कहा कि वह नकदी की कमी से जूझ रहे श्रीलंका के घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रहा है और उम्मीद है कि आईएमएफ समर्थित कार्यक्रम पर बातचीत को फिर से शुरू करने की अनुमति देने के लिए राजनीतिक संकट जल्द ही हल हो जायेगा।