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अंतरराष्ट्रीय सेमिनार : भारत के रामानुरागियों से मिले मॉरीशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति

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अंतरराष्ट्रीय सेमिनार : भारत के रामानुरागियों से मिले मॉरीशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व के अनेक देशों में रामकथा अपने-अपने ढंग से लिखी गई है। मूल कथा तो एक ही है लेकिन स्थानीय संदर्भों के साथ मूल कथा में अनेक कथाएं और प्रसंग अलग ढंग से जुड़े हुए मिलते हैं। रामकथा विश्व संदर्भ महाकोष की तैयारी के संदर्भ में साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई से जुड़े 28 विद्वानों का एक दल संस्था के सचिव डॉ प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में 8 मई से 15 मई तक मॉरीशस के दौरे पर रहा। साप्ताहिक दौरा कार्यक्रम में दल के सदस्यों ने महात्मा गांधी संस्थान मॉरीशस, विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस, वृहत पुरोहित संघ, फ्लिक एंड फ्लैक, रामायण केंद्र मॉरीशस, हिंदी प्रचारिणी सभा तथा राम कथा सेवा सदन के सदस्यों के साथ मिलकर मॉरीशस में राम कथा के विविध प्रसंगों पर विस्तार से चर्चा की। मॉरीशस में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित संगोष्ठी में प्रोफेसर कृष्णा श्रीवास्तव, डॉ किरण त्रिपाठी, डॉ कुसुम सिंह, डॉ किरण शर्मा, डॉ सुनीता चौहान, डॉ पुष्पा सिंह, डॉ राजरानी, डॉ अंजली, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के अध्यक्ष डॉ बनवारीलाल जाजोदिया, सुरेश चंद्र तिवारी, डॉ रंजय सिंह, डॉ माधुरी सिंह, अलका भटनागर, डॉ शीरीन कुरैशी, एडवोकेट रमा शंकर शुक्ल, मीमांसा ओझा, अरविंद श्रीवास्तव, डॉ हिमांशु मिश्र दीपक, डॉ नीतू कुमारी, आदि ने रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के वैश्विक संदर्भ पर आधारित अपने आलेखों की प्रस्तुति दी। साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के सदस्यों के साथ संवाद करने के लिए मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद्र जगन्नाथ और मॉरीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन से भी मुलाकात की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामकथा के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे शोध कार्य के बारे में उन्हें जानकारी दी। साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत विश्व हिंदी सचिवालय में हिंदी के वैश्विक प्रचार प्रसार में रामकथा की भूमिका पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का भी आयोजन किया गया। इस दौरान अलग-अलग संस्थानों में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए जिसमें प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत, डॉ माधुरी सिंह, मीमांसा ओझा आदि ने मनभावन प्रस्तुतियां दी। ललित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में रामलीला का मंचन किया गया, जिसमें शबरी प्रसंग सहित रामकथा के अनेक प्रसंगों को दिखाया गया। अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने वाले मॉरीशस के विद्वानों में डॉ विनोद वाला अरुण, डॉ राजवंती मातादीन, सुनीता पाहुजा, डॉ सरिता बुधु, डॉ अलका धनपत, डॉ बी डी मुंजल, रामप्रताप, पी महादेव आदि शामिल रहे।
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