एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के यूक्रेन पर तेज होते हमले के बीच कच्चे तेल का दाम लगातार सातवें आसमान पर पहुंचता जा रहा है। मंगलवार को कच्चे तेल का दाम 8 से 9 फीसदी उछला। अमेरिकी मानक कच्चे तेल का दाम एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल को पार गया है। अमेरिकी तेल की कीमत 11% बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह 2014 के बाद तेल के मूल्य का उच्च स्तर है। रॉयटर्स ने बाजार के जानकारों के हवाले से लिखा है कि फिलहाल जो भी स्थिति बनी हुई है उससे आशंका बन गई छोटी अवधि में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही रहेंगी।
भारत के लिए अहम ब्रेंट क्रूड ऑयल 7.85 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 105.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यानी करीब आठ फीसदी का इजाफा हुआ। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 8.54 डॉलर बढ़ा औऱ यह 104.26 डॉलर तक पहुंच गया। इसमें करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कच्चे तेल में यह इजाफा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के उस फैसले के बावजूद दिखाई दिया, जिसमें करीब 60 मिलियन बैरल कच्चा तेल रणनीतिक रिजर्व भंडार से निकालकर बाजार में लाने की घोषणा की गई। वहीं आईईए की मंत्रिस्तरीय बैठक में 6 करोड़ बैरल तेल बाजार में लाने का फैसला हुआ। ऑयल प्राइस डॉट कॉम के अनुसार, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इसका वैश्विक बाजार पर असर न के बराबर होगा। इसमें से तीन करोड़ कच्चा तेल अकेले अमेरिका बाजार में लाएगा। बाकी यूरोप और एशिया के देश 3 करोड़ बैरल तेल जारी करेंगे। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ये 6 करोड़ बैरल दुनिया में तेल की रोजाना खपत से भी कम है।
कच्चे तेल में बाजार में हलचल की सबसे बड़ी रूसी मुद्रा रूबल के औंधे मुंह गिरने और उसके द्वारा तेल का बाजार खो देने से दिख रही है। विश्लेषकों का कहना है कि रूस के कच्चे तेल का आयात सभी बड़े उपभोक्ता देश पूरी तरह बंद कर दें, ये संभावना तो बेहद कम है, लेकिन आर्थिक प्रतिबंधों के बाद यह संभावना कम होगी कि चीन उससे क्रूड ऑयल खरीदना जारी रखे। कच्चा तेल जब 100 डॉलर के पार पहुंचा था तो उसने सात साल का उच्चतम स्तर हासिल किया था, 24 फरवरी को रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।