एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस की ओर से छेड़े गए इस युद्ध का असर दोनों ही देशों पर पड़ने की संभावना है। जहां पहले ही रूस-यूक्रेन कोरोनावायरस की वजह से बड़े नुकसान झेल चुके हैं। वहीं, अब युद्ध का नुकसान भी दोनों देशों को उठाना पड़ेगा। जर्मनी के कील इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों की तरफ से लगाया गया हर एक प्रतिबंध रूस के लिए कांटे की तरह है। इसमें कहा गया है कि अगर यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका रूस पर तेल और गैस से जुड़े प्रतिबंधों का एलान करते हैं, तो उसकी 120 लाख करोड़ रुपये (1600 अरब डॉलर) की अर्थव्यवस्था, जो कि मुख्य तौर पर तेल-गैस के निर्यात पर निर्भर है, वह एक बार में 4.1 फीसदी तक गिर जाएगी।
वहीं, अब तक लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से रूस का बाकी सामान का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, जिससे रूस को लगातार नुकसान उठाने पड़ रहे हैं। पश्चिमी देशों की तरफ से मशीनरी और उपकरणों पर प्रतिबंधों की वजह से रूस को अर्थव्यवस्था में 0.5 फीसदी, मोटर वाहन और पार्ट्स में प्रतिबंधों की वजह से 0.3 फीसदी और इलेक्ट्रिक उपकरणों पर प्रतिबंध के चलते 0.1 फीसदी जीडीपी का नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके अलावा करीब एक दर्जन अन्य क्षेत्रों पर यूरोपीय देशों के प्रतिबंध से रूस की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह तबाह होने की संभावना है। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर रूस इस बीच बाकी देशों की तेल-गैस सप्लाई बंद करने की धमकी देता है, तो भी इससे पुतिन सरकार का नुकसान ही ज्यादा है, क्योंकि इन हालात में रूस के पास विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से घटता जाएगा।