एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन पर हमले के बाद रूसी सैनिकों ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा जमा लिया है। इसके बाद से यहां से होने वाले रेडिएशन में बढ़त दर्ज की गई है। यूक्रेन सरकार ने बीते गुरुवार को बताया था कि रूसी सैनिकों ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा कर लिया है। इसी जगह पर साल 1986 में भयानक परमाणु त्रासदी हुई थी।
इस क्षेत्र से होने वाले रेडिएशन पर नजर रखने वाली संस्थाओं ने बीते गुरुवार को बताया है कि यहां पर रेडिएशन बीस गुना तक बढ़ गया है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इस क्षेत्र में एक अन्य परमाणु हादसा होने की आशंकाएं काफी कम है। यूक्रेन के परमाणु नियामक के मुताबिक, रेडिएशन (विकिरण) में दर्ज की गई बढ़त की वजह 4000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस परमाणु संयंत्र क्षेत्र में अचानक गाड़ियों की आवाजाही का बढ़ना है।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी क्षतिग्रस्त परमाणु रिएक्टर के करीब : रेडिएशन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी क्षतिग्रस्त परमाणु रिएक्टर के करीब दर्ज की गई है। यहां पर रेडिएशन के स्तर पर लगातार नजर रखी जाती है। यहां हर घंटे रेडिएशन की मात्रा मापी जाती है। रिएक्टर के करीब सामान्य स्थितियों में प्रति घंटे तीन माइक्रोसिएवर्ट्स रेडिएशन का सामना करना होता है। लेकिन गुरुवार को यह मात्रा बढ़कर प्रतिघंटे 65 माइक्रोसिएवर्ट्स तक पहुंच गई जो कि उस मात्रा की पांच गुना है जो एक ट्रांस-अटलांटिक फ्लाइट में होती है।
शेफील्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ी न्यूक्लियर मटीरियल विशेषज्ञ प्रोफेसर क्लेयर कॉरखिल ने बताया है कि यह बढ़ोतरी एक जगह पर केंद्रित थी और रिएक्टर क्षेत्र की तरफ आने वाली मुख्य सड़कों पर भी बढ़ोतरी देखी गई है। प्रोफेसर कॉरखिल कहती हैं कि चेर्नोबिल जोन में और इसके नजदीकी क्षेत्रों में वाहन और लोगों की आवाजाही बढ़ने से रेडियोऐक्टिव धूल उड़ी होगी। उन्होंने ये भी कहा है कि अगर आने वाले दिनों में आवाजाही नहीं होती है तो रेडिएशन लेवल गिरना चाहिए। लेकिन इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि चिंताजनक है। यूक्रेन सरकार ने बताया है कि रूसी सैन्य टुकड़ियों ने यूक्रेन की सैन्य टुकड़ियों के साथ भीषण संघर्ष के बाद राजधानी कीएव से लगभग 130 किलोमीटर उत्तर की दिशा में स्थित चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा कर लिया है।