एबीएन न्यूज नेटवर्क, जामताड़ा। देश में साइबर अपराध के सबसे बड़े गढ़ के रूप में कुख्यात जामताड़ा जिले में पुलिस ने अपराधियों के विरुद्ध एक बार फिर कड़ा और निर्णायक प्रहार किया है। जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शंभू कुमार सिंह को मिली सटीक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कर्माटांड़ और जामताड़ा थाना क्षेत्रों में एक व्यापक और योजनाबद्ध सर्जिकल स्ट्राइक की।
इस विशेष छापेमारी अभियान के दौरान पुलिस ने झाड़ियों में छिपकर देशव्यापी ठगी का नेटवर्क चला रहे कुल 9 शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथ दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण, सक्रिय सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किये गये हैं।
जामताड़ा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान एसपी शंभू कुमार सिंह ने इस पूरी कार्रवाई का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए साइबर अपराध के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अमित कुमार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया था। इस त्वरित कार्रवाई दल में साइबर थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक राजेश मंडल, पुलिस निरीक्षक नितीश कुमार और पुलिस अवर निरीक्षक बिनोद सिंह समेत अन्य चुनिंदा पुलिसकर्मी शामिल थे।
पुलिस टीम ने पहली बड़ी कार्रवाई कर्माटांड़ थाना अंतर्गत ग्राम सियाटांड़ और मट्टांड़ के समीप स्थित झाड़ीनुमा परती जमीन पर की, जहां घेराबंदी कर 5 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, दूसरी समानांतर कार्रवाई जामताड़ा थाना क्षेत्र के मोहड़ा से पोसोई जाने वाली पुरानी पक्की सड़क के दाहिने किनारे स्थित घनी झाड़ियों में की गयी, जहां से 4 अन्य अपराधियों को पकड़ा गया। ये अपराधी इन सुनसान झाड़ियों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाकर देश के भोले-भाले नागरिकों को निशाना बना रहे थे।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक, अमृत रुईदास, मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। वह जामताड़ा में स्थित अपने ससुराल आया हुआ था और वहीं बैठकर इस काले धंधे को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार किए गए अपराधियों का विवरण निम्नानुसार है:
कैशबैक का झांसा व फर्जी कस्टमर केयर
ये अपराधी पीड़ितों को फोन पे पर भारी कैशबैक मिलने का एक फर्जी पॉप-अप या मैसेज भेजते थे और उन्हें एक्सेप्ट बटन दबाने के लिए बरगलाते थे। जैसे ही पीड़ित झांसे में आकर बटन दबाता, उसके खाते से पैसे अपराधियों के डमी वॉलेट या बैंक खातों में स्थानांतरित हो जाते थे। इसके अतिरिक्त, ये गूगल सर्च इंजन पर देश की नामी कंपनियों के फर्जी कस्टमर केयर नंबर अपलोड कर देते थे, जिससे संपर्क करने वाले ग्राहक सीधे इनके जाल में फंस जाते थे।
ये अपराधी स्वयं को नामी बैंकों के मुख्य अधिकारी या मैनेजर बताकर सीधे लोगों को कॉल करते थे। पीड़ितों को डराया जाता था कि उनका क्रेडिट अथवा डेबिट कार्ड तत्काल ब्लॉक होने वाला है। कार्ड को सुचारू रूप से चालू रखने के नाम पर ये उनका 16 अंकों का एटीएम नंबर, सीवीवी और मोबाइल पर प्राप्त होने वाला गोपनीय ओटीपी हासिल कर लेते थे और पलक झपकते ही ई-वॉलेट के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे।
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