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अमेरिका-ईरान में फिर टकराव ने बढ़ायी पश्चिम एशिया की टेंशन

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अमेरिका-ईरान में फिर टकराव ने बढ़ायी पश्चिम एशिया की टेंशन
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अमेरिका-ईरान सीजफायर पर फिर संकट: बहरीन पर अटैक के बाद अब होर्मुज में टैंकर पर हमला, पश्चिम एशिया में बढ़ी टेंशन 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को एक वाणिज्यिक टैंकर पर हमला हुआ। यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखायी दे रहा है। ब्रिटेन की सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड आॅपरेशंस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले में जहाज के सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है।

हालांकि, हमले की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए हथियार और टैंकर को हुई क्षति के बारे में तत्काल विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गयी है। समाचार लिखे जाने तक किसी संगठन या देश ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि घटना के पीछे कौन था। बहरीन के आरोप के बीच हुई घटना। 

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब खाड़ी देश बहरीन ने आरोप लगाया है कि ईरान ने उसे निशाना बनाकर कई ड्रोन भेजे। ईरान ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले बृहस्पतिवार को भी ओमान तट के पास, फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे एक जहाज पर हमला हुआ था। 

विभिन्न रिपोर्टों में उस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराने के आरोप लगाये गये थे, हालांकि उन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से आधिकारिक स्वीकारोक्ति भी सामने नहीं आयी। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी रास्ते से होता है। 

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, इराक और ईरान के तेल और गैस निर्यात के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य या सुरक्षा घटना का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। 

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से अंतरिम समझ की खबरें आयी थीं और दोनों पक्ष व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि, समुद्री हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में हालात अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं और किसी भी नई घटना से तनाव फिर बढ़ सकता है।

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