- ईरान के पक्ष में उतरा चीन, खाड़ी देशों को दिया सख्त संदेश!
- अमेरिका-इजरायल के खिलाफ निकाली भड़ास
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच चीन ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है।बीजिंग ने इन हमलों को ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन को हमलों की पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की।
उन्होंने खाड़ी देशों से अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने और विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करने का आह्वान किया। रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान पर हमलों में एक चीनी नागरिक की मौत हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च तक 3,000 से अधिक चीनी नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई। ईरान और उसके सहयोगी संगठनों, जैसे हिजबुल्लाह, ने जवाबी हमले किए हैं। संघर्ष अब खाड़ी के कई बड़े शहरों दुबई, अबू धाबी और दोहा तक फैल चुका है।
वांग यी ने अपने बयान में कहा कि हालिया अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और ईरान की लाल रेखाओं को पार करती है। लेकिन क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत जरूरी है। चीन ने संकेत दिया है कि वह तनाव कम करने में सकारात्मक भूमिका” निभाना चाहता है।
अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहा है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय देशों से संयम और वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील भी कर रहा है। बीजिंग के लिए यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और अरबों डॉलर के आर्थिक हितों का सवाल भी है।
चीन के आर्थिक हित क्यों अहम ?
चीन ईरान और कई खाड़ी देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से लेता है। वैश्विक व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर निर्भर है। ओमान जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, लंबे समय से अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।ओमान ने 2015 के ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) समझौते के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।