एबीएन डेस्क। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने चीन की बड़ी साजिश का खुलासा किया है । चीन में शी जिनपिंग के सत्ता संभालने के बाद चीनी सेना और आक्रामक हुई है और इसकी महत्वाकांक्षाएं भी बढ़ी हैं। पेंटागन का दावा है कि चीन दुनिया में अपने सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहा है व अपनी सेनाओं की मदद के लिए पहले से ही अतिरिक्त सैन्य ठिकानों और रसद सुविधाओं को देने की योजना बना रहा है। हालांकि अभी तक एक ही सैन्य ठिकाने की पुष्टि की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि चीन अपनी नौसेना, वायुसेना, थलसेना की मदद के लिए अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
पेंटागन के अधिकारियों ने कहा कि चीन अपनी सेनाओं की मदद के लिए पहले से ही अतिरिक्त सैन्य ठिकानों और रसद सुविधाओं को देने की योजना बना रहा है। बता दें कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। पीएलए में करीब 20 लाख सैन्यकर्मी हैं।
अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड के कमांडर जनरल स्टीफन टाउनसेंड ने अप्रैल में कहा था कि चीन से सबसे बड़ा खतरा अफ्रीका के अटलांटिक तट पर उसकी नौसेना सुविधाओं से होगा। उन्होंने कहा था, मैं एक बंदरगाह के बारे में बात कर रहा हूं जहां वे हथियारों के साथ फिर से हमला कर सकते हैं और नौसेना के जहाजों की मुरम्मत कर सकते हैं। इससे पहले अमेरिका से चेतावनी मिलने के बाद अबूधाबी से 80 किमी उत्तर में स्थित खलीफा के कार्गो बंदरगाह पर निर्माण कार्य रोकना पड़ा था। चीन पर आरोप लगा था कि UAE को बिना बताए वहां गुप्त तरीके से सेना के लिए ठिकाने बनाए जा रहे हैं। साल 2018 में यूएई और चीन के बीच COSCO शिपिंग पोर्ट अबूधाबी टर्मिनल को अपग्रेड करने के लिए डील हुई थी। ये बंदरगाह अल दफरा एयर बेस और जेबेल अली दोनों के पास है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन कंबोडिया में भी सैन्य ठिकाने बना रहा है। हाल ही में कंबोडिया ने रीम नवल बेस पर अमेरिकी की ओर से बनी दो इमारतों को ध्वस्त कर दिया था। बाद में कंबोडिया के रक्षा मंत्री ने पुष्टि करते हुए बताया था कि चीन बुनियादी ढांचे के विस्तार में मदद कर रहा था। हाल ही में वाल स्ट्रीट जनरल ने आरोप लगाया था कि कंबोडिया ने चीन को नेवी सुविधा देने के लिए 30 साल के लिए एग्रीमेंट किया था। हालांकि, कंबोडिया की सरकार ने इसका खंडन किया था।