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हमास-इजराइल युद्ध में कूदा हिज्जबुल्ला

हमास-इजराइल युद्ध में कूदा हिज्जबुल्ला
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1 लाख लड़ाकों वाला आतंकी संगठन, हमास-इजराइल युद्ध में नये प्लेयर की एंट्री

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक बयान में हिज्जबुल्ला ने कहा कि उसने सीरिया के इजरायली कब्जे वाले गोलान हाइट्स की सीमा पर स्थित विवादित चेबा फार्म्स में इजरायली ठिकानों पर बड़ी संख्या में रॉकेट और गोले का इस्तेमाल किये जाने की बात कही है।

फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास द्वारा इजरायल पर विनाशकारी हमले की खबर से तो सभी वाकिफ हैं। लेकिन इजरायल और हमास की जंग के बीच लेबनान का आतंकी संगठन हिज्जबुल्ला भी कूद चुका है। हिज्जबुल्ला ने इजरायल के तीन ठिकानों पर रॉकेट और गोले दागे हैं। 

एक बयान में हिज्जबुल्ला ने कहा कि उसने सीरिया के इजरायली कब्जे वाले गोलान हाइट्स की सीमा पर स्थित विवादित चेबा फार्म्स में इजरायली ठिकानों पर बड़ी संख्या में रॉकेट और गोले का इस्तेमाल किए जाने की बात कही है। इसने फिलिस्तीनी प्रतिरोध के साथ अपनी एकजुटता की भी घोषणा की है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह समूह वास्तव में क्या है?

कौन है हिज्बुल्लाह और कैसे हुई समूह की स्थापना

हिज्बुल्लाह के नाम का अर्थ है ईश्वर की पार्टी और ये लेबनान का एक शिया इस्लामी आतंकवादी संगठन है। थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) ने इसे दुनिया का सबसे भारी हथियारों से लैस गैर-राज्य संगठन के रूप में वर्णित किया है, जिसके पास बिना निर्देशित तोपखाने रॉकेटों के साथ-साथ बैलिस्टिक, एंटीएयर, एंटीटैंक और एंटीशिप मिसाइलों का एक बड़ा और विविध भंडार है। 

आधुनिक इतिहास में लेबनान 1943 तक फ्रांसीसी जनादेश के अधीन था और इसके समाप्त होने के बाद, सत्ता विभिन्न धार्मिक समूहों में विभाजित हो गयी, जिसमें देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पद विशेष धार्मिक संप्रदायों के लोगों के लिए आरक्षित थे।

काउंसिल आन फॉरेन रिलेशंस (सीएफआर) के अनुसार, हिजबुल्लाह की उत्पत्ति लेबनानी गृहयुद्ध (1975-1990) के दौरान हुई थी, जो देश में बड़ी, सशस्त्र फिलिस्तीनी उपस्थिति पर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम था। 

तनावपूर्ण जातीय और धार्मिक विभाजन के बीच 1948 के बाद से फिलिस्तीनी शरणार्थियों के आगमन यहूदी लोगों के लिए एक देश के रूप में इजराइल के निर्माण ने तनाव को और बढ़ा दिया। उनकी उपस्थिति के कारण 1978 में और फिर 1982 में फिलिस्तीनी गुरिल्ला लड़ाकों को खदेड़ने के लिए इजरायली सेनाओं ने दक्षिणी लेबनान पर आक्रमण किया। 

इससे हिजबुल्लाह का गठन हो गया, जो 1979 में ईरान में एक धार्मिक इस्लामी सरकार के गठन से भी प्रेरित है। सीएफआर के अनुसार ईरान और उसके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने नवोदित मिलिशिया को धन और प्रशिक्षण प्रदान किया। 

इसलिए, यह पश्चिम एशिया की दो प्रमुख शक्तियों और उनकी प्रतिद्वंद्विता को भी दशार्ता है। अमेरिका का अनुमान है कि ईरान हिजबुल्लाह को करोड़ों डॉलर की फंडिंग देता है और उसके पास हजारों लड़ाके हैं।

क्या हैं हिज्बुल्लाह के उद्देश्य

यह पश्चिम एशिया में इजराइल और पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता है। इसने रूस और ईरान के साथ मिलकर पड़ोसी सीरिया में गृह युद्ध के दौरान राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का भी समर्थन किया है। 

2000 के दशक के मध्य में लेबनानी राजनीति में अधिक दिखाई देने लगा और वर्तमान में देश की 128 सदस्यीय संसद में से 13 पर इसका कब्जा है।  सहयोगियों के साथ वह सत्तारूढ़ सरकार का हिस्सा है। लेकिन हाल के वर्षों में, देश में बेरोजगारी, सरकारी ऋण और गरीबी जैसे बिगड़ते मुद्दों के साथ इसके काम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

जानें हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमताएं

हिजबुल्लाह ने लक्षित हमले किये हैं जैसे कि 1983 में लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी और फ्रांसीसी सैनिकों के आवास वाले बैरक पर आत्मघाती हमला, जिसमें तीन सौ से अधिक लोग मारे गये थे। खाड़ी सहयोग परिषद जैसी कई पश्चिमी सरकारें इसे एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित करती हैं। 

खाड़ी सहयोग परिषद में छह पश्चिम एशियाई देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इजराइल और हिजबुल्लाह ने पहली बार 2006 में एक महीने तक युद्ध लड़ा था और अक्सर गोलीबारी होती रही है।

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