एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले महीने प्रतिबंध हटाने के बाद से चीन में कोरोना के मामलों में भारी उछाल आया है। दुनिया के कई देश अब इस बात से चिंतित होने लगे हैं कि चीन कोरोना के सही आंकड़े पेश नहीं कर रहा है जिससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है कि कोरोना के प्रसार की वास्तविक स्थिति क्या है? यानी ड्रैगन की अपारदर्शिता लोगों के लिए खतरा बनकर सामने आ सकती है। बता दें कि भारी दबाव के बाद चीन ने सात दिसंबर को प्रतिबंधों को खोलना शुरू कर दिया जिसके बाद वहां 15 लोगों की मौत की सूचना सामने आई। इसके तुरंत बाद सरकार ने उन मानदंडों को संकुचित कर दिया जिनके द्वारा वायरस से होने वाली मौतों को दर्ज किया जाता है।
अधिकारियों ने भी माना डाटा का पैमाना बहुत छोटा : चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले हफ्ते स्वीकार किया था कि एकत्र किये गये डाटा का पैमाना अनिवार्य सामूहिक पीसीआर परीक्षण की तुलना में बहुत छोटा है। सीडीसी अधिकारी यिन वेनवु ने कहा कि अधिकारी अब अस्पतालों और स्थानीय सरकारी सर्वेक्षणों के साथ-साथ आपातकालीन कॉल वॉल्यूम और बुखार की दवा की बिक्री से डेटा संकलित कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई देशों ने पिछले सप्ताह कहा था कि वे संक्रमण डाटा पर पारदर्शिता की कमी के कारण चीन से आगमन पर परीक्षण प्रतिबंध लगा रहे हैं।
चीन ने दैनिक संक्रमण और मृत्यु के आंकड़े प्रकाशित करना बंद किया
बीजिंग ने स्वीकार किया है कि पिछले महीने अनिवार्य सामूहिक परीक्षण के अंत के बाद प्रकोप के पैमाने को ट्रैक करना असंभव हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने दैनिक राष्ट्रव्यापी संक्रमण और मृत्यु के आंकड़े प्रकाशित करना बंद कर दिया है। यह जिम्मेदारी चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) को हस्तांतरित कर दी गयी है, जो चीन द्वारा आठ जनवरी को बीमारी के लिए अपने प्रबंधन प्रोटोकॉल को डाउनग्रेड करने के बाद महीने में केवल एक बार आंकड़े प्रकाशित करेगा।