एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के नये वेरिएंट ओमिक्रॉन बीएफ.7 ने चीन में भारी तबाही मचा रखी है। चीन में हर दिन 40-50 हजार मामले सामने आ रहे हैं और हजारों लोगों की मौत हो रही है। अस्पतालों में मरीजों को बेड उलपब्ध नहीं है। दवाइयों और जरूरी उपकरणों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। मुर्दों को दफनाने के लिए लंबी कतारें लगी हैं। लेकिन चीन इस सच्चाई को झुठला रहा है। चीन दुनिया से कह रहा है कि सब ठीक है। चीन में बढ़ते कोविड मरीजों से भारत ही नहीं दुनिया के और देश भी परेशान है। अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी समेत कई देशों में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। चीन ने शुक्रवार को बताया कि उसके यहां कोविड से कोई मौत नहीं हुई है, जबकि कोविड केसों की संख्या 5000 से अधिक बताई है। लेकिन चीन की इस बात पर कोई भी विश्वास करने को तैयार नहीं, इसके पीछे की वजह है, सोशल मीडिया पर तैरते वो वीडियो, जिसमें लाशों के ढेरों को साफ देखा जा सकता है। आखिर चीन क्यों छिपा रहा है दुनिया से सच्चाई, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?
वैसे तो चीन किसी को अपनी सच्चाई बताता नहीं। इसकी वजह है शी जिनपिंग की अजेय और हिटलरशाही छवि। वो चाहे गलवान का मामला हो या फिर तवांग की घटना। चीन ने हमेशा ही दुनिया के सामने झूठ बोला है। चीन इस बात को अच्छी तरह जानता है कि अगर वो दुनिया के सामने सच बोलेगा तो शी जिनपिंग की छवि को बहुत बड़ा धक्का लगेगा। शी जिनपिंग ने सितंबर में बलपूर्वक तीसरी बार सत्ता हासिल की है। शी जिनपिंग नहीं चाहते है कि उनकी अजेय रहने वाली छवि को किसी तरह का नुकसान पहुंचे। यह पहला मौका नहीं है जब दुनिया के सामने चीन ने अपनी सच्चाई छिपाई हो। इससे पहले उईगर मुसलमानों पर किए गए अत्याचार हो या फिर आतंकवाद पर बचाव। चीन हमेशा दुनिया को धोखा देता रहा है।
दूसरी सबसे बड़ी वजह है चीन की अर्थव्यवस्था। कोविड के बढ़ते मामलों और जिनपिंग की जीरो कोविड पॉलिसी ने चीन को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है। चीन की अर्थव्यवस्था सबसे खराब दौर से गुजर रही है। हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने चीन की अर्थव्यवस्था के अनुमान को 4.8 से घटाकर 2.7 फीसदी कर दिया है। यह चीन का अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन है। चीन ने कामगारों में फैक्ट्रियों में ही बंद कर रखा है। लोग कोविड के डर से फैक्ट्रियों से दीवारें फांदकर भाग रहे हैं। लेकिन चीन ने उन्हें रोकने के लिए तारों की फेसिंग में करंट, इलेक्ट्रिक शॉक समेत कई ऐसे काम कर रहा है, जिससे कामगारों में दहशत का माहौल है। कोरोना की पहली लहर में भी चीन की अर्थव्यवस्था इस तरह नहीं डगमगाई थी। साल 2020 में जब कोविड की पहली लहर आई थी, तब भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। 2020 में भारत की इकॉनोमी -7.5 प्रतिशत थी, जबकि इसी अवधि में चीन की इकॉनोमी 3 प्रतिशत के ऊपर थी।
चीन में बढ़ते कोविड के मामलों से भारत ही नहीं अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी, दक्षिण कोरिया समेत कई देश परेशान हैं क्योंकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश है। कच्चे माल से लेकर चीन में बने हुए प्रॉडक्ट दुनिया के कई देशों में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। ऐसे में चीन में कोविड के केस बढ़े तो एक बार फिर दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है। पहले कोरोना महामारी और बाद रूस-यूक्रेन युद्ध ने विश्व की परेशानी बढ़ाई है। अमेरिका, ब्रिटेन, भारत समेत कई विकसित और विकासशील देशों में महंगाई ने लोगों की कमर तोड़कर रख दी है। बता दें कि चीन अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।