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चीन की नजर अफगान के 741 अरब की खनिज संपदा पर

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चीन की नजर अफगान के 741 अरब की खनिज संपदा पर
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एबीएन डेस्क। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद चीन अब उसके साथ दोस्ताना बढ़ने की कोशिश में जुट गया है। कब्जे से पहले तालिबान चीन के लिए आंखों की किरकिरी था लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पाकिस्तान के स्पोर्ट से आंतक फैला रहे तालिबान के जरिए अपने हित साधने के लिए चीन अब इस आंतकी समूह के साथ काम करने को तैयार हो चुका है और इसका मुख्य कारण है अफगानिस्तान का बड़ा खजाना। अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसके पास 10 खरब डॉलर यानी करीब 741 खरब रुपए से भी ज्यादा की खनिज संपत्ति है। अगर सही से इस्तेमाल हो तो अफगानिस्तान में दुनिया का सबसे ज्यादा लीथियम रिजर्व भी है। हालांकि, पिछले चार दशकों से युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहे अफगानिस्तान को ये खनिज फायदा नहीं दे सके लेकिन अब चीन ने अपनी पैनी नजरें इसपर गड़ा दी हैं और यही कारण है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद तालिबान के साथ दोस्ती को तैयार है। हालांकि साल 2001 में अफगानिस्तान में वैश्विक अर्थव्यवस्था आज की परिस्थितियों की तुलना में काफी अलग थी। साल 2001 में अमेरिका की अफगानिस्तान में एंट्री से पहले यहां न तो टेस्ला जैसी कंपनी थी और न ही आईफोन। हालांकि अब ये आधुनिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। अब हाईटेक चिप और बड़ी क्षमता वाली बैटरी का जमाना है जिन्हें बनाने के लिए तरह-तरह के खनिजों की जरूरत है । साल 2003 से 2020 के बीच चीनी सेना में सीनियर कर्नल रहे झो बो ने न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार के एक लेख में लिखा, अमेरिकी सेना की वापसी के बाद चीन ही काबुल की ज्यादा से ज्यादा जरूरतों को पूरा कर सकता है। तालिबान को मान्यता देने से लेकर अफगान में निवेश तक और इसके एवज में चीन को अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचे के विकास का मौका मिल सकता है और साथ में ही अफगान की 10 खरब डॉलर की खनिज संपत्ति तक उसकी पहुंच हो सकती है, जहां तक अभी कोई नहीं पहुंच सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने साल 2010 में ही यह अनुमान पेश किया था कि अफगानिस्तान में 10 खरब डॉलर से ज्यादा की खनिज संपत्ति है, जिसका अभी तक पता नहीं लग सका है। हालांकि, अफगान सरकार ने उस समय भी यह दावा किया था कि उनके पास इससे तीन गुना ज्यादा खनिज संपत्ति है। इसमें लीथियम रिजर्व के साथ ही दुर्लभ धातु भी शामिल हैं, जो ग्लोबल ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए जरूरी हैं। हालांकि, देश की खस्ता हालत की वजह से अभी तक इसकी खोज शुरू नहीं हो सकी।
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