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राज्य घटाएं पेट्रोल, डीजल पर वैट, इससे मुद्रास्फीतिक दबाव कम होगा : रिजर्व बैंक गवर्नर

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राज्य घटाएं पेट्रोल, डीजल पर वैट, इससे मुद्रास्फीतिक दबाव कम होगा : रिजर्व बैंक गवर्नर
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि राज्यों के वाहन ईंधन पर मूल्य वर्धित कर (वैट) घटाने से मुद्रास्फीतिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार पहले ही राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने का आग्रह कर चुकी है। अब रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी केंद्र के सुर में सुर मिलाते हुए वाहन ईंधन पर वैट घटाने की वकालत की है। उन्होंने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करने के बाद कहा कि राज्यों के पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले मूल्य वर्धित कर को घटाने से मुद्रास्फीतिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। सरकार ने पिछले महीने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में आठ रुपए और डीजल पर छह रुपए लीटर की कटौती की थी। इससे आम लोगों को कुछ राहत मिली है। सरकार ने लोगों को और राहत देने के लिए राज्यों से भी वैट घटाने का अनुरोध किया था। हालांकि, ज्यादातर राज्यों ने सरकार के इस अनुरोध को अनदेखा किया है। दास ने कहा कि 21 मई को ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद शहरी परिवारों के बीच एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इस कदम से उनकी मुद्रास्फीति अपेक्षाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा, इस स्थिति में राज्यों का पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाना मुद्रास्फीति के साथ-साथ अपेक्षाओं के दबाव को कम करने में मदद कर सकता है। इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी समेत मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने भी राज्यों से ईंधन पर वैट घटाने की अपील की थी।
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