एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सरकार की नीतियों और उसके द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों से देश को कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई स्थिति से उबरने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि इन कदमों में कॉरपोरेट कर में कटौती और अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण जैसे उपाय शामिल हैं। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत विशेष सप्ताह समारोह में आयोजित कार्यक्रम ‘भारत की आर्थिक यात्रा @75’ में कहा कि भारत ने अपने मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ चुनौतियों का सामना किया और सफलता पाई। इस कार्यक्रम का आयोजन आर्थिक मामलों के विभाग और सेबी ने मिलकर किया था। वित्त मंत्री ने कहा कि 2014 से सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों ने अर्थव्यवस्था और लोगों को मुश्किल समय का मुकाबला करने में सक्षम बनाया। महामारी के दौरान सरकार के लक्षित दृष्टिकोण ने नागरिकों की मदद की।
सीतारमण ने कहा, अर्थव्यवस्था को उबारने और (2014 के बाद से) वृद्धि की सभी बाधाओं को दूर करने के बावजूद चुनौतियां थीं और ऐसे में जो बड़े कदम उठाए गए- कॉरपोरेट टैक्स को कम करना, अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण, आईबीसी कोड जीएसटी - उसने हमें ऐसे हालात का सामना करने के लिए तैयार किया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ी : उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में कोविड के बावजूद भारतीय खुदरा निवेशकों ने शेयर बाजार तक पहुंचने के लिए आॅनलाइन साधन खोजे हैं और निवेशक शिक्षा में सेबी की भूमिका रही है।
बढ़ेगी भारत की ग्रोथ : वहीं मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि महामारी के बादल छंटने और जियो-पॉलिटिकल टेंशन घटने के बाद देश की ग्रोथ रेट बढ़ेगी। वित्त मंत्रालय द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित विशेष साप्ताहिक समारोह को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि भारत आज ऐसी स्थिति में है जहां उसे वैश्विक वृहद मौद्रिक नीतियों और राजनीतिक घटनाक्रमों दोनों की वजह से कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। सीईए ने कहा कि इस साल भारत के समक्ष सतत उच्च वृद्धि, मुद्रास्फीति को नीचे लाने और राजकोषीय घाटे को संतुलन में रखने की चुनौतियां होंगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि भारतीय रुपये का बाह्य मूल्य कायम रहे।