एबीएन सेंट्रल डेस्क। उद्योग के जानकारों का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद मार्च से भारत के लिए रूसी तेल वितरण में वृद्धि हुई है और भारत मास्को से और भी सस्ता तेल खरीदने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि चीन जो पहले से ही रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है को भारी छूट पर रूस से अधिक तेल खरीदने की उम्मीद है। इसका मतलब कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
भारत और चीन जैसे प्रमुख तेल आयातक देश कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जूझ रहे हैं, जो पिछले साल से बढ़ी हैं। केप्लर के प्रमुख तेल विश्लेषक मैट स्मिथ ने कहा, हम मानते हैं कि चीन और भारत रूस से और ज्यादा कच्चा तेल खरीदने के लिए कदम उठाएगा।
यह प्रमुख विश्व शक्तियों और कंपनियों के बयानबाजी से बिल्कुल विपरीत होगा जो रूस से तेल खरीदना छोड़ रहे हैं। यूक्रेन पर रूस के अकारण और अनुचित युद्ध के परिणामस्वरूप, यूएस, यूके और यूरोपीय संघ ने रूस पर ऊर्जा प्रतिबंध लगाए हैं। विश्लेषकों ने कहा कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वह अतिरिक्त कच्चे तेल के साथ बेचने में असमर्थ है।