एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने उनसे वादा किया है कि वे छह महीने के भीतर फ्लैक्स-फ्यूल वाहनों का विनिर्माण शुरू कर देंगे। गडकरी ने ईटी ग्लोबल बिजनेस समिट को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक परिवहन को 100 फीसदी स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से चलाने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस हफ्ते, मैंने सभी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रबंध निदेशकों और सियाम के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। गडकरी के मुताबिक, उन्होंने मंत्री से वादा किया कि वे ऐसे वाहनों के लिए फ्लैक्स-फ्यूल इंजन का विनिर्माण शुरू करेंगे, जो एक से ज्यादा ईंधन से चल सकते हैं। फ्लैक्स-फ्यूल, गैसोलीन और मेथनॉल या इथेनॉल के मिश्रण से तैयार एक वैकल्पिक ईंधन है। उन्होंने कहा कि टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों ने पहले ही दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए फ्लैक्स-फ्यूल इंजन का विनिर्माण शुरू कर दिया है।
क्या होते हैं फ्लैक्स फ्यूल वाहन : आपको बता दें कि फ्लैक्स फ्यूल इंजन एक तरह से इंटरनल कंबस्शन इंजन ही होता है जो एक से ज्यादा टाइप के फ्यूल से चल सकता है और चाहे तो इसे मिक्स फ्यूल पर भी चलाया जा सकता है। इसमें पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल और मेथेनॉल का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है।।फ्यूल कंपोजिशन सेंसर और ईसीयू प्रोग्रामिंग जैसी टेक्नोलॉजी के आ जाने से इंजन अपने आप मात्रा तय करते हुए फ्यूल का इस्तेमाल कर सकता है। फ्लैक्स फ्यूल से ईंधन की लागत घट जाती हैं। वहीं ऐसे ईंधन पर चलने वाली गाड़िया कम प्रदूषण फैलाती हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री ने सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों से इस पहल को शुरू करने की अपील की है। इथेनॉल या गैसोलीन का इस्तेमाल करना है, तो उसके लिए ऐसी गाड़ियां बाजार में उतारनी होंगी जो फ्लैक्स इंजन पर चलने वाली हों। ऐसी गाड़ियां दुनिया के कई हिस्सों में बनती और चलती हैं। भारत में अभी इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है। एफएवी में इंटरनल कंबशन इंजन लगा होता है जो गैसोलीन, गैसोलीन के मिश्रण और इथेनॉल पर काम करता है। ऐसी गाड़ियों में ईंधन में 83 परसेंट तक इथेनॉल मिलाया जा सकता है।