एबीएन बिजनेस डेस्क। जनवरी में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर 1.3 फीसदी बढ़ा है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक डेटा में कहा गया है कि इसके पीछे वजह खनन और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के प्रदर्शन में सुधार रहा है। जनवरी 2021 में इंडैक्स ऑफ इंडस्ट्रीयल प्रोडक्शन (IIP) में जनवरी 2021 में 0.6 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, खनन क्षेत्र में ग्रोथ जनवरी 2021 में 2.4 फीसदी की गिरावट मुकाबले 2.8 फीसदी बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जनवरी में 1.1 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है।।इसमें एक साल पहले के समान महीने में 0.9 फीसदी की दर से गिरावट आई थी। पिछले तीन महीनों में जनवरी के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे तेज ग्रोथ देखी गई है। ऊर्जा उत्पादन में ग्रोथ घटी : हालांकि, ऊर्जा उत्पादन में ग्रोथ घटकर 0.9 फीसदी पर रही है। जनवरी 2021 में इसमें 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि में, आईआईपी ग्रोथ 13.7 फीसदी पर रही है। वित्त वर्ष 2020-21 की समान अवधि के दौरान 12 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। जनवरी में प्राइमेरी गुड्स कैटेगरी में 1.6 फीसदी की ग्रोथ देख गई है। वहीं, कैपिटल गुड्स में जनवरी महीने के दौरान 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई है। जबकि, इंटरमीडिएट गुड्स कैटेगरी में जनवरी महीने में 0.9 फीसदी ग्रोथ हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर/ कंस्ट्रक्शन गुड्स में जनवरी महीने में 5.4 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में जनवरी 2022 में 3.3 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में 2.1 फीसदी की ग्रोथ हुई है।
क्या होता है IIP : बता दें कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है। इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है। आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं।
सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा मानकों के मुताबिक, किसी उत्पाद के इसमें शामिल किए जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रुपए होना चाहिए। इसके अलावा यह भी शर्त है कि वस्तु के उत्पादन के मासिक आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए। इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है। फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है।