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अगले पांच साल में 40,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी पेट्रोनेट

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अगले पांच साल में 40,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी पेट्रोनेट
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एबीएन बिजनेस डेस्क। निया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात टर्मिनल का परिचालन करने वाली पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड अगले चार-पांच वर्षों में 40,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी जिसमें विदेशी आपूर्ति स्रोत भी शामिल हैं। पेट्रोनेट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एके सिंह ने गुरुवार को कहा कि कंपनी की पेट्रोरसायन कारोबार क्षेत्र में भी प्रवेश की योजना है। इसके लिए कंपनी एक प्रोपेन डिहाइड्रोजेनरेशन संयंत्र में 12,500 करोड़ रुपए का निवेश करेगी जो आयातित माल को प्रोपिलीन में बदलेगा। श्री सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि पेट्रोनेट की ओडिशा के गोपालपुर में 1,600 करोड़ रुपए की लागत से एक फ्लोटिंग (हवा में तैरती) एलएनजी आयात इकाई स्थापित करने की भी योजना है। पिछले साल अमेरिका के लूसियाना में टेल्यूरियन की एलएनजी परियोजना में 2.5 अरब डॉलर निवेश संबंधी गैर-बाध्यकारी समझौता करने वाली कंपनी विदेशी परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर भी गौर करेगी। श्री सिंह ने इसका अधिक ब्योरा न देते हुए कहा, हम विदेशी निवेश के बढ़िया मौकों का मूल्यांकन हमेशा ही करते रहते हैं। अगर ऐसा करना देश के लिए फायदेमंद और बेहतर विकल्प है तो निश्चित रूप से हम ऐसा करेंगे। एलएनजी -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडी की गई प्राकृतिक गैस होती है ताकि जहाजों के जरिए आसानी से इसकी ढुलाई हो सके। बाद में इसे तरल रूप में बदल दिया जाता है। भारत का घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन ऊर्जा, उर्वरक एवं सीएनजी क्षेत्रों की घरेलू मांग को आधा भी पूरा नहीं कर पाता है। बाकी जरूरत को एलएनजी के रूप में आयात किया जाता है। सिंह ने कहा कि पेट्रोनेट घरेलू एलएनजी आयात क्षमता के विस्तार और पेट्रोरसायन कारोबार पर 17,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसमें गुजरात के दाहेज टर्मिनल की क्षमता को बढ़ाकर 2.25 करोड़ टन प्रतिवर्ष करने पर 600 करोड़ रुपए और एक अतिरिक्त भंडारण टैंक बनाने पर 1,245 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है। दाहेज आयात टर्मिनल दुनिया में सबसे बड़ा है और इस बंदरगाह में तीसरी जेटी भी जोड़ी जाएगी जहां प्रोपेन, इथेन और एलएनजी का आयात किया जा सके।
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