- 60 अरब डॉलर की गिरावट, जानिये क्या है वजह
- रुपये में उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आरबीआई लगातार डॉलर बेच रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और डॉलर की बढ़ती मांग से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना हुआ है
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गयी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 8.6 अरब डॉलर घटकर 726 अरब डॉलर रह गया। रुपये को डॉलर के मुकाबले ज्यादा गिरने से बचाने के लिए आरबीआई लगातार बाजार में डॉलर बेच रहा है।
इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद से लगातार गिरावट जारी है। पिछले पांच हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार करीब 59.7 अरब डॉलर कम हो चुका है।
विदेशी मुद्रा भंडार में क्यों आ रही गिरावट?
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह रुपये पर बना दबाव है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आरबीआई बाजार में डॉलर बेच रहा है। इससे डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है और रुपये को सहारा मिलता है। हालांकि, इसके चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक, आरबीआई ने सप्ताह के दौरान करीब 9.8 अरब डॉलर बेचे। हालांकि, विदेशी मुद्रा के मूल्य में बदलाव से कुछ फायदा भी हुआ, जिससे भंडार में कुल गिरावट कम रही।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना रह सकता है। इसकी वजह भारत के भुगतान संतुलन में घाटे की आशंका है। इसके अलावा कच्चे तेल के आयात के लिए डॉलर की मांग भी बनी रहेगी।
विदेशी मुद्रा भंडार में कितनी आयी कमी?
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 7.14 अरब डॉलर घटकर 597.61 अरब डॉलर रह गयीं। यह देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। वहीं, सोने का भंडार भी 1.32 अरब डॉलर घटकर 105.09 अरब डॉलर रह गया।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से मिलने वाले विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर में 10.9 करोड़ डॉलर की कमी आयी और यह घटकर 18.55 अरब डॉलर रह गया। आईएमएफ में भारत की आरक्षित स्थिति भी एक करोड़ डॉलर घटकर 4.78 अरब डॉलर रह गयी।
रुपये को संभालने के लिए आरबीआई ने क्या कदम उठाये?
रुपये पर दबाव कम करने के लिए आरबीआई ने हाल में कई कदम उठाये हैं। केंद्रीय बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों के लिए डॉलर उपलब्ध कराने की अलग व्यवस्था शुरू की है। इससे इन कंपनियों को अपनी जरूरत के डॉलर सीधे बाजार से खरीदने की आवश्यकता कम होगी।
इसके अलावा विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए गए हैं। आरबीआई ने 10 अक्टूबर को रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी वाले सौदों पर लगाम लगाने के लिए नए उपायों की घोषणा की थी। कुछ डेरिवेटिव लेनदेन के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम से जुड़ा अतिरिक्त रिजर्व रखने की शर्त भी लागू की गई है। इन कदमों से रुपये पर कुछ दबाव कम हुआ है। हालांकि, तेल आयात और दूसरी जरूरतों के लिए डॉलर की मांग अभी भी बनी हुई है।
डॉलर के मुकाबले रुपये की क्या स्थिति है?
शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिली। रुपया 10 पैसे मजबूत होकर 94.96 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.06 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। यह 8 सितंबर के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर है। पूरे सप्ताह के दौरान रुपये में करीब 1.9 फीसदी की तेजी आई, जो पिछले चार वर्षों में उसका सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन है।
एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख के मुताबिक, आरबीआई ने चालू सप्ताह में भी बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे हैं। उनका कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर में बड़ी गिरावट नहीं आती, तब तक रुपये के मौजूदा स्तर के आसपास बने रहने की संभावना है।