आरबीआई की रेट हाइक और महंगे क्रूड से बाजार धड़ाम, 4.31 लाख करोड़ डूबे
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी दबाव देखने को मिला। आरबीआई की ब्याज दरों में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बाजार के फ्यूचर्स में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सेंसेक्स 429.11 अंक टूटकर 72,638.70 पर आ गया वहीं निफ्टी 173.05 अंक गिरकर 22,603.05 के लेवल पर बंद हुआ।
7 अक्टूबर को इरए पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ?470.44 लाख करोड़ रह गया। एक दिन पहले यानी 6 अक्टूबर को यह करीब ?474.75 लाख करोड़ था यानी एक कारोबारी दिन में बाजार की कुल वैल्यू में करीब 4,30,691 करोड़ यानी लगभग 4.31 लाख करोड़ की कमी आयी।
शेयर बाजार में गिरावट के 4 बड़े कारण
आरबीआई ने बढ़ायी ब्याज दर
आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है। ब्याज दर बढ़ने से कंपनियों और ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है। इससे कंपनियों की फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है और लोगों की खर्च करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से ब्याज दर बढ़ने के बाद शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला।
क्रूड $101 के पार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1% बढ़कर 101.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। अमेरिका में तूफान के कारण तेल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका और सऊदी अरब पर हूती हमलों की चिंता से कच्चे तेल की कीमतों को सपोर्ट मिला। पश्चिम एशिया से सप्लाई बढ़ने की खबर भी इस दबाव को पूरी तरह कम नहीं कर सकी। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है क्योंकि इससे देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बन सकता है।
एफआईआई की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार आठवें कारोबारी सत्र में बिकवाल रहे। 6 अक्टूबर को एफआईआईएस ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 2,961 करोड़ की नेट बिकवाली की। हालांकि बिकवाली की रफ्तार में कुछ कमी आयी है लेकिन लगातार विदेशी पैसा निकलने से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी फ्यूचर्स में कमजोरी
भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर अमेरिकी बाजार के फ्यूचर्स की कमजोरी का भी असर पड़ा। डाओ फ्यूचर्स करीब 110 अंक और नैस्डैक फ्यूचर्स करीब 50 अंक नीचे कारोबार कर रहे थे।