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एआई के डर से सिर्फ 8 दिन में 6 लाख करोड़ डूबे

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एआई के डर से सिर्फ 8 दिन में 6 लाख करोड़ डूबे
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अब टीसीएस-इंफोसिस समेत बड़ी आईटी कंपनियों ने बदली रणनीति 

एबीएन बिजनेस डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर बढ़ती आशंकाओं का असर सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शेयर बाजार पर भी इसका सीधा प्रभाव दिख रहा है। पिछले आठ कारोबारी दिनों में आईटी स्टॉक्स में भारी बिकवाली के चलते करीब 6 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू घट चुकी है। एनआईएफटी आईटी इंडेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी है, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। 

आईटी कंपनियों पर जबरदस्त असर बाजार में डर इस बात का है कि एआई आधारित टूल्स एप्लिकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसी पारंपरिक आईटी सर्विसेज को काफी हद तक आॅटोमेट कर सकते हैं। इससे कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल और मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है। 

हालांकि, प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियां लगातार यह भरोसा दिला रही हैं कि एआई उनकी सेवाओं को खत्म नहीं करेगा, बल्कि उन्हें और सक्षम बनायेगा। ब्रोकरेज फर्म जेपी मोर्गन चेज का मानना है कि एआई नए अवसर भी पैदा करेगा और आईटी कंपनियां इस बदलाव से लाभ उठा सकती हैं। वहीं एचएसबीसी (रिसर्च रिपोर्ट के संदर्भ में) का कहना है कि एआई मौजूदा बिजनेस मॉडल के भीतर ही काम करेगा, जहां आईटी सर्विस प्रदाताओं की भूमिका बनी रहेगी। 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? 

विशेषज्ञों का तर्क है कि बड़े संगठनों में एआई किसी मैजिक बॉक्स की तरह अकेले काम नहीं कर सकता। उसे डेटा सिस्टम, आॅडिट चेक्स, साइबर सुरक्षा और रिस्क कंट्रोल जैसे मजबूत ढांचे की जरूरत होती है, जिसमें आईटी वेंडर्स और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म की अहम भूमिका रहती है। हालांकि, मुनाफे को लेकर आशंका बनी हुई है। 

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस का अनुमान है कि अगले तीन से चार वर्षों में एआई के व्यापक उपयोग से आईटी सेक्टर के रेवेन्यू में 9 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। कुल मिलाकर, एआई को लेकर बाजार में डर और अवसर दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। अल्पकाल में अनिश्चितता बनी रह सकती है, लेकिन दीर्घकाल में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आईटी कंपनियां इस तकनीकी बदलाव को कितनी तेजी और रणनीतिक तरीके से अपनाती हैं। 

कंपनियों ने बदली रणनीति 

देश की प्रमुख आईटी कंपनियां अब एआई को लेकर सैद्धांतिक चर्चा से आगे बढ़कर व्यावहारिक बदलाव कर रही हैं। वे अपने आॅपरेशंस में एआई कोडिंग असिस्टेंट, आटोमेशन टूल्स और एआई एजेंट्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके और डिलीवरी टाइम कम किया जा सके। एक्वेरियस कैपिटल के संदीप गोगिया के अनुसार, आईटी कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को एआई टूल्स के साथ काम करने की व्यवस्थित ट्रेनिंग दे रही हैं। 

वर्कफोर्स को एआई-आधारित कोडिंग, आॅटोमेशन प्लेटफॉर्म और इंटेलिजेंट एजेंट्स के उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे बदलती टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को ढाल सकें। इसी रणनीति के तहत टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (टीसीएस) ने एआई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। 

कंपनी ने 1 गीगावॉट क्षमता वाले डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया है और अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक कर्मचारियों को एआई से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया है। यह रुझान दर्शाता है कि आईटी कंपनियां एआई को खतरे के रूप में नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देख रही हैं। फोकस नौकरियों को खत्म करने के बजाय स्किल अपग्रेडेशन और नयी तकनीकों के साथ तालमेल बैठाने पर है, ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनायी जा सके।

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