- निर्यात पर पाबंदी के बीच भारत की बड़ी चाल, सरकार कर रही है बातचीत
- चीन के निर्यात प्रतिबंध के बीच भारत जापान-वियतनाम से रेयर अर्थ मिनरल्स के आयात को लेकर काम कर रहा है। साथ ही घरेलू मैग्नेट के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी काम हो रहा है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। चीन के हालिया आयात प्रतिबंधों के बाद भारत जापान और वियतनाम से रेयर अर्थ मिनरल्स आयात करने को लेकर बातचीत कर रहा है। इसके अलावा, भारत रेयर अर्थ आक्साइड को मैग्नेट में बदलने के लिए एक प्रोत्साहन योजना शुरू करने की भी तैयारी कर रहा है, जिसे लागू होने में दो साल लग सकते हैं। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि इस योजना पर अगले 15 से 20 दिनों में अंतिम फैसला लिया जायेगा।
चीन ने जरूरी मिनरल्स के निर्यात पर लगायी रोक
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा बढ़ाये गये टैरिफ के जवाब में, बीजिंग ने 4 अप्रैल को सात भारी और मध्यम रेयर अर्थ मिनरल्स और मैग्नेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इन मिनरल्स में सेमेरियम, गैडोलिनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेशियम, स्कैंडियम और येट्रियम शामिल थे। ये मिनरल्स डिफेंस, एनर्जी और आटोमोटिव टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी है।
अब चीनी कंपनियों को इन मिनरल्स के निर्यात के लिए डिफेंस लाइसेंस लेना होगा। कुमारस्वामी ने मंगलवार को इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के निर्माण को बढ़ावा देने वाली योजना पोर्टल के लॉन्च के दौरान पत्रकारों से कहा, हमने खनन मंत्रालय के साथ चर्चा की है, और वे इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि अगले 15 से 20 दिनों में अंतिम फैसला हो जोगा।
भारत अन्य विकल्पों पर कर रहा है विचार
बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले बताया था कि सरकार 3,000 से 5,000 प्रोत्साहन योजनाओं को डेवलप करने और चीन की आपूर्ति से जोखिम कम करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर विचार कर रही है। अगर मैग्नेट पर निर्यात नियमों में ढील नहीं दी गयी, तो भारत चीन के साथ मोटर और सब-असेंबली के लिए बातचीत कर सकता है।
इसको लेकर स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा जारी है, और भारी उद्योग मंत्रालय को अलग-अलग प्रस्ताव मिले हैं। कुछ कंपनियों ने 50 प्रतिशत समर्थन की मांग की है, जबकि अन्य ने 20 प्रतिशत समर्थन मांगा है। टऌक के सचिव कामरान रिजवी ने कहा, यह एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के अधीन होगा, जो हमें समर्थन का स्तर तय करने में मदद करेगा।
दो साल लग सकते हैं घरेलू प्रोसेसिंग में
रिजवी ने कहा कि समर्थन की बड़ी जरूरत है, क्योंकि शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर वैश्विक रेयर अर्थ आॅक्साइड और मैग्नेट की कीमतों में केवल 5 प्रतिशत का अंतर है। चीन के एकाधिकार ने मैग्नेट की कीमतों को बहुत कम रखा है। उन्होंने कहा, हम जिस प्रोत्साहन की जरूरत है, वह कंपनियों को आक्साइड से मैग्नेट उत्पादन में निवेश के लिए सहायता देना है। भारत में उत्पादित मैग्नेट वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों, इसके लिए सरकारी समर्थन की कितना होगा, यह तय करनी होगी। रेयर अर्थ आॅक्साइड को मैग्नेट में बदलने में कम से कम दो साल लग सकते हैं।
मिडवेस्ट साल के अंत तक 500 टन की आपूर्ति करेगा
जब पूछा गया कि क्या कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी, रिजवी ने कहा कि यह प्रोत्साहन की राशि पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, अगर राशि 1,000 करोड़ रुपये से कम है, तो हमारे मंत्री और वित्त मंत्री इसे मंजूरी दे सकते हैं। अगर यह 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है, तो कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। हम अभी भी सब्सिडी की राशि का आकलन कर रहे हैं।
इस बीच, मिडवेस्ट ने रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में रुचि दिखाई है और इस साल दिसंबर तक 500 टन की आपूर्ति करने का वादा किया है। मंत्री ने इसकी पुष्टि की। बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले बताया था कि हैदराबाद स्थित मिडवेस्ट एडवांस्ड मटेरियल्स ने नॉन-फेरस मटेरियल्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ रेयर अर्थ माइनिंग और प्रोसेसिंग में रुचि दिखायी है।
भारत की रेयर अर्थ कैपेसिटी
वर्तमान में, भारतीय रेयर अर्थ्स लिमिटेड, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत है, देश में रेयर अर्थ मिनरल्स का एकमात्र होल्डर है। इसके पास सालाना 1,500 टन मैग्नेट उत्पादन की पर्याप्त संसाधन क्षमता है। कुमारस्वामी ने इसको लेकर खनन मंत्री से मुलाकात की है, और मंत्रालय ने पुष्टि की कि जापान और वियतनाम जैसे देशों से रेयर अर्थ मिनरल्स आयात करने के प्रयास चल रहे हैं।
उद्योग रुकावट से बचने के लिए उठा रहा है कदम
जुलाई से संभावित उत्पादन प्रभावों पर, कुमारस्वामी ने कहा कि कंपनियां रुकावट को कम करने के लिए कदम उठा रही हैं। उन्होंने कहा, हालांकि यह समझा गया था कि कुछ रुकावट हो सकती है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों से सुधार के संकेत मिलते हैं। उत्पादन रुकने की कोई रिपोर्ट नहीं है। पूरी तरह से असेंबल किये गये कंपोनेंट को अभी भी आयात किया जा सकता है और कंपनियां समाधान पर तेजी से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा, हम मोटर और उनके कंपोनेंट पर चर्चा कर रहे हैं। अगर रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो हमें विकल्प तलाशने की जरूरत पड़ सकती है।
कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश
इसके अलावा, भारत इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के लिए वैश्विक आॅटोमोटिव कंपनियों से निवेश आकर्षित करने के लिए अमेरिका, जर्मनी, चेकोस्लोवाकिया और वियतनाम जैसे देश के साथ-साथ उनके दूतावासों से संपर्क कर रहा है। योजना के तहत चार महीने तक अप्लाई करने का समय दिया जायेगा। हालांकि, अभी तक टेस्ला ने इसमें भाग लेने में रुचि नहीं दिखायी है। रिजवी ने कहा, आखिरकार, हमें 21 अक्टूबर तक पता चल जायेगा कि कौन सी वैश्विक आटोमेकर कंपनियां इसमें शामिल होंगी।