शेयर बाजार की बड़ी छलांग, सेंसेक्स 1,500 अंक उछला, निवेशकों को हुआ मोटा मुनाफा
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार आज सुबह गिरावट के साथ खुले, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही हालात बदलने लगे। दोपहर बाद सेंसेक्स में 1,450 अंक से अधिक तेजी आयी और निफ्टी भी 23,800 अंक के पार पहुंच गया। वित्तीय शेयरों में खूब खरीदारी से शेयर बाजार में तेजी आयी।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1508 अंक बढ़कर 78,553 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 414 अंक बढ़कर 23,851 पर बंद हुआ। इस तेजी से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 418.98 लाख करोड़ रुपये हो गया।
आज की तेजी के पीछे कई कारण
- बैंकिंग शेयरों में मजबूती : चौथी तिमाही के नतीजों से पहले बैंकिंग शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली। बैंक निफ्टी करीब 2% चढ़ गया। एडीएफसी बैंक, आइसीआइसीआइ बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज शेयरों ने सेंसेक्स की बढ़त में अहम भूमिका निभायी। 19 अप्रैल को आने वाले तिमाही नतीजों से पहले निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दे रहा है।
- विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को सपोर्ट : विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआइआइएस) ने बुधवार को 3,936 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। बीते दो कारोबारी सत्रों में उनका निवेश 10,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के डॉ वीके विजयकुमार के अनुसार, अमेरिका-चीन के टैरिफ संकट के चलते भारत अब निवेश के लिए एक मजबूत विकल्प बन रहा है।
- जापान-अमेरिका व्यापार वार्ता से एशियाई बाजारों में तेजी : जापान और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता की सकारात्मक प्रगति से एशियाई शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गयी। जापानी निक्केई 0.7% बढ़ा, जबकि येन में कमजोरी आयी। राष्ट्रपति ट्रंप ने वार्ता में अप्रत्याशित रूप से भाग लेकर जापानी प्रतिनिधि से महत्वपूर्ण प्रगति की घोषणा की।
- डॉलर में कमजोरी : डॉलर इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गयी, जो गुरुवार को 99.56 पर आ गया। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेशकों की भावना बेहतर हुई। डॉलर की कमजोरी से रुपया मजबूत होता है और विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ता है, जिससे शेयर बाजार को सपोर्ट मिलता है।
- अमेरिका ने टैरिफ छूट बढ़ायी, वैश्विक बाजारों को राहत : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित 75 देशों पर लगाये गये अतिरिक्त टैरिफ को 9 जुलाई तक टाल दिया है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार तनाव में अस्थायी राहत मिली है और निवेशकों की भावना में सुधार देखा गया है।
- कच्चे तेल की कीमतों में नरमी : ब्रेंट क्रूड की कीमत 66.40 डॉलर और डब्ल्यूटीआइ क्रूड 62.90 डॉलर प्रति बैरल पर रही। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत को लाभ मिल रहा है, क्योंकि यह दुनिया का एक बड़ा तेल आयातक है। इससे महंगाई और चालू खाता घाटे पर दबाव कम होता है।