अजय दीप वाधवा
एबीएन बिजनेस डेस्क। टैक्स आडिट और कॉस्ट अकाउंटेंट्स किसी भी क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारना है तो यह अति आवश्यक है कि वहां प्रतिस्पर्धा बढ़ायी जाये। सेवा या वस्तु प्रदान करने वाली संस्थाओं की संख्या बढ़ेगी तो वे उपभोक्ता को खुश करने के लिए अपनी सेवाओं में सुधार करेगी। हम यह भी जानते हैं कि भारत में सरकार की आय का एक बहुत बड़ा स्रोत आय कर या इनकम टैक्स है।
सरकार को आय कर से जितनी ज्यादा आय प्राप्त होगी उतना भारत सरकार आम आदमी को देने वाली स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा और जन कल्याण सेवाओं या सुविधाओं में अधिक खर्च कर पायेगी। साथ ही आय बढ़ने से सरकार आम आदमी से मिलने वाली करों की दरों में कमी भी कर पायेगी जिस से आम आदमी को राहत मिलगी।
इसी उद्देश्य से भारत के आय कर प्रावधानों में टैक्स आडिट या कर अंकेक्षण की व्यवस्था है। अगर किसी कर दाता की वार्षिक आय 1 करोड़ या 10 करोड़ (जैसी स्थिति हो) से ज्यादा है तो उसे अपना टैक्स आडिट करवाना है। यह अनिवार्य है। वर्तमान में टैक्स आडिट सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स कर सकते हैं। हाल के वर्षों में यह पाया गया है कि सरकार के प्रयासों से निरन्तर आय कर दाताओं में वृद्धि हो रही है पर उस हिसाब से आडिटर की संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है जिसके कारण अनेक केसों में टैक्स आडिट मात्र एक वार्षिक रिचुअल बन कर रह गई है।
इसकी गुणवत्ता में सुधार न होने के कारण सरकार की आय में भी विशेष वृद्धि नहीं हो रही है। इसी कारण अब बेहद यह आवश्यक हो गया है कि टैक्स आडिटर्स की संख्या में न सिर्फ वृद्धि की जाए बल्कि अन्य प्रोफेशन, जैसे कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट, को भी इसमें आने का अवसर दिया जाये जिस से कर और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके।
भारत में दी इंस्टीट्यूट आफ कॉस्ट अकाउंटेंट आफ इंडिया की स्थापना संसद के एक विशेष अधिनियम से हुई थी और इसके सदस्य कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट कहलाते हैं। वे भी अपने कोर्स वही सारे आय कर के नियम पढ़ते हैं जो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पढ़ते हैं। पर भारत सरकार ने आय कर अधिनियम में इन्हें सिर्फ इन्वेंटरी वैल्युएशन के कार्य तक सीमित रखा है।
अब जबकि भारत सरकार आय कर नियमों में अमूल चूल परिवर्तन लाना चाहती है और इसी कारण संसद के वर्तमान बजट सत्र में नये कानून की रूपरेखा सरकार ने पेश की है जिसे संसद की विशेष समिति को विचार हेतु भेजा गया है, में सरकार टैक्स आडिट में सुधार ला सकती है।
समिति और सरकार को इस नए प्रस्तावित कानून में कॉस्ट अकाउंटेंट्स को टैक्स आडिट करने वाले अकाउंटेंट्स की श्रेणी में शामिल करना चाहिए; इस से न सिर्फ आडिट की गुणवत्ता में सुधार आएगा बल्कि सरकार की आय भी बढ़ेगी। आज जब सरकार हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता लाना चाहती है तो उसे टैक्स आडिट में ऐसा आम जन हित में लाना ही चाहिए। (लेखक कॉस्ट अकाउंटेंट आडिट विशेषज्ञ हैं।)