एडी बाधवा
एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अंतरिम बजट पेश किया है। जिसमें कोई कर परिवर्तन नहीं किया गया है।
प्रश्न : बजट 2024 में कर में राहत है क्या?
उत्तर : विशेष नहीं। दरअसल, यह बजट अंतरिम था तो भारत सरकार ने कर में कोई परिवर्तन नहीं किया है। स्टार्ट अप और पेंशन फंड के लिए मामूली कर राहत है पर आम आदमी के लिए कर में कोई परिवर्तन नहीं है।
प्रश्न : क्या आय कर के दर में कोई परिवर्तन है?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : इस बजट की बड़ी घोषणाएं क्या हैं?
उत्तर : विशेष नहीं। पर वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया है। दो करोड़ नये घर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में बनाये जायेंगे। सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर में 11.11 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी, जो कि हमारी जीडीपी का 3.4% होगा। 40,000 रेल की सामान्य बोगियों को वंदे भारत जैसी बोगियों में बदला जायेगा।
प्रश्न : सरकार का डिसइन्वेस्टमेंट पर क्या टारगेट है?
उत्तर : वर्ष 2023-24 के लक्ष्य को 30,000 करोड़ कर दिया गया है। 2024-25 का यह लक्ष्य 50,000 करोड़ है।
प्रश्न : किसानों के लिए बजट में क्या है?
उत्तर : किसान फसल योजना में 4 करोड़ किसानों को लाया जायेगा। पीएम किसान योजना के अंतर्गत 11.8 करोड़ किसानों को लाया जायेगा।
निष्कर्ष : वास्तव में अगर आप मोदी जी का 10 वर्ष के शासन के सारे बजट को देखें तो उन सबमें सरकार ने पूर्व सरकारों की तरह आम जनता को तुरंत खुश करने वाली घोषणाएं करने से स्वयं को बचाया है और अपना ज्यादा फोकस उन निर्णयों को लेने में लगाया है जिसमें देश को दूरगामी लाभ हो।
इस बार तो सरकार को ऐसा करने का बहाना मिल गया क्योंकि चुनाव के सरकार ने अंतरिम बजट पेश करने का निर्णय लिया और स्वयं को लोभ लुभावने वादों को करने से बचा लिया। इस कारण इस बार का बजट भी दूरगामी कदमों, जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि की ज्यादा बात करता है।
मेरे विचार से अगर यही सरकार चुनाव के बाद पुन: आती है तो पूर्ण बजट में बिलकुल लोभ लुभावने वायदे नहीं होंगे और सरकार का सरकार पूरा ध्यान भारत को 2047 में विकसित राष्ट्र बनाने पर होगा जिसका इस बजट में हल्की से चर्चा भी है।
प्रधान मंत्री ने दुबई में जो घोषणा की थी उसका भी इस बजट में ध्यान रखा गया है और सरकार ने छत पर आधारित सोलर पैनल, ई बस औेर ग्रीन एनर्जी की बात की है जिस से भारत 2070 तक कार्बन न्यूट्रल के लक्ष्य को प्राप्त कर सके। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात कर सलाहकार हैं।)